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मेहंदीपुर बालाजी में गूंजा ‘हिंदुत्व ही जीवन पद्धति’ का संदेश: विशाल कलश यात्रा और हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब

राजस्थान: के दौसा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मेहंदीपुर बालाजी में सोमवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन ने पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का वातावरण बना दिया। कार्यक्रम से पहले निकाली गई भव्य कलश यात्रा और शोभायात्रा ने कस्बे को भक्तिमय रंग में रंग दिया। टोडाभीम रोड से शुरू हुई यह यात्रा मुख्य बाजारों और मार्गों से होती हुई एवीएम स्कूल परिसर तक पहुंची, जहां मुख्य सम्मेलन आयोजित किया गया।

कलश यात्रा में उमड़ा उत्साह

सुबह से ही महिलाओं का समूह पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर सिर पर कलश धारण किए अनुशासित ढंग से चल रहा था। युवाओं की टोलियां भजन और धार्मिक गीतों की धुन पर झूमती नजर आईं। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। सजीव झांकियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक एकता के संदेश प्रस्तुत किए गए।

आयोजकों के अनुसार, कलश यात्रा का उद्देश्य समाज में एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना था। बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग इस आयोजन में शामिल हुए, जिससे पूरा कस्बा धार्मिक उल्लास से भर गया।

सम्मेलन में रखे गए विचार

एवीएम स्कूल में आयोजित सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने समाज और राष्ट्र निर्माण के विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य वक्ता बजरंग दल के विभाग संयोजक नरेश कुमार ने कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होता है।

उन्होंने कहा कि हिंदुत्व किसी जाति विशेष तक सीमित नहीं है और न ही केवल पूजा-पद्धति का विषय है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है। इसका मूल भाव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ में निहित है। उनके अनुसार, समाज में समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी अपनाने और नागरिक अनुशासन को जीवन में उतारना ही इस विचारधारा का वास्तविक उद्देश्य है।

उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि “एक मंदिर, एक कुआं और एक श्मशान—इन स्थानों पर सभी भेदभाव समाप्त हो जाते हैं। यही सच्चे अर्थों में समानता और एकता का प्रतीक है।” उन्होंने लोगों से जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में संगठित होने का आह्वान किया।

विश्वगुरु भारत की परिकल्पना

वक्ताओं ने कहा कि संस्कारयुक्त, स्वाभिमानी और संगठित समाज ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है। उनका मानना था कि जब परिवार मजबूत होंगे, तब समाज सशक्त होगा और तभी राष्ट्र उन्नति करेगा।

इस अवसर पर वैद्य सतीश जैमिनी ने कहा कि समय के साथ चुनौतियों और शक्तियों का स्वरूप बदलता रहता है, लेकिन सनातन चेतना शाश्वत बनी रहती है। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, मातृभाषा में संवाद को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक प्रतीकों के सम्मान पर बल दिया।

उन्होंने कुटुंब प्रबोधन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रत्येक घर में सांस्कृतिक मूल्यों का पालन होना चाहिए। तुलसी का पौधा, पारिवारिक संवाद और परंपराओं का सम्मान परिवार को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच पारिवारिक संवाद की परंपरा को बनाए रखना आवश्यक है।

सामाजिक समरसता और अनुशासन पर जोर

सम्मेलन में सामाजिक समरसता को केंद्रीय विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में जाति, वर्ग और क्षेत्र के आधार पर विभाजन से ऊपर उठकर एकता की भावना विकसित करनी होगी। उन्होंने नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और अनुशासन का पालन करने की अपील की।

पर्यावरण संरक्षण को भी प्रमुख विषय के रूप में रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। पेड़-पौधों की रक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूकता को समाज में बढ़ावा देना आवश्यक है।

बड़ी संख्या में उपस्थित रहे लोग

सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आयोजन स्थल पर अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। मंच पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और अतिथि मौजूद रहे, जिन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को उत्साहपूर्ण बनाए रखा। लोगों ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरण का महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

निष्कर्ष:

मेहंदीपुर बालाजी में आयोजित यह हिंदू सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का मंच साबित हुआ। कलश यात्रा के माध्यम से जहां एकता और श्रद्धा का प्रदर्शन हुआ, वहीं सम्मेलन में दिए गए संदेशों ने समाज में संगठन, समरसता और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया।

वक्ताओं का मानना है कि यदि समाज संगठित, अनुशासित और संस्कारयुक्त बने, तो भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य दूर नहीं है। इस आयोजन ने क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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