राजस्थान: के बांदीकुई क्षेत्र में एक विवादित घटना ने प्रशासन और वकीलों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। बसवा क्षेत्र में एक अधिवक्ता के मकान को कथित रूप से बिना नोटिस तोड़े जाने के विरोध में बुधवार को वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
यह पूरा मामला एडवोकेट किशनलाल सोडिया के मकान से जुड़ा है, जिसे दो दिन पहले नगरपालिका बसवा की टीम ने आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया था। आरोप है कि इस कार्रवाई में न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
अभिभाषक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में वकील एकत्रित हुए और एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने दोषी नगरपालिका कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि यदि 23 मार्च तक कोई कदम नहीं उठाया गया, तो वे न्यायिक कार्य का बहिष्कार करेंगे।
वकीलों का आरोप है कि नगरपालिका की टीम ने एडवोकेट किशनलाल सोडिया के मकान की सीढ़ियां, रेलिंग और दीवार को अचानक तोड़ दिया। इस दौरान उनका परिवार घर के अंदर ही मौजूद था, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बनी रही।
घटना की जानकारी मिलते ही जब एडवोकेट सोडिया मौके पर पहुंचे, तो आरोप है कि नगरपालिका कर्मचारी वहां से चले गए। इस पूरे घटनाक्रम ने वकीलों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिभाषक संघ के अध्यक्ष सचिदानंद मिश्रा, सचिव रामबाबू यादव और कोषाध्यक्ष इंद्रदत्त बुंदेल सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
वकीलों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अवैध है और इससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए और मकान के टूटे हिस्से का पुनर्निर्माण कराया जाए।
अभिभाषक संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। साथ ही, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सहयोग से राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के किसी भी निर्माण को तोड़ना न केवल अवैध है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।
स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की कार्रवाई बिना नियमों के होती रही, तो आम नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन एसडीएम कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब सभी की नजरें 23 मार्च पर टिकी हैं, जब तक प्रशासन को कार्रवाई का समय दिया गया है। यदि तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो बांदीकुई में बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
बांदीकुई में वकील के मकान तोड़े जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वकीलों की चेतावनी के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है।
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