राजस्थान: में उपभोक्ता आयोगों से जुड़े अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए Rajasthan High Court की जोधपुर मुख्यपीठ ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है या जल्द समाप्त होने वाला है, वे नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक अपने पदों पर बने रहेंगे।
यह फैसला जस्टिस Vinit Kumar Mathur और जस्टिस Chandra Shekhar Sharma की खंडपीठ ने 18 मार्च 2026 को सुनाया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों को पहले ही कार्यमुक्त कर दिया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए।
दरअसल, राजस्थान में राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों में कई अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। लेकिन राज्य सरकार द्वारा अभी तक नए नियमों के तहत नई नियुक्तियां नहीं की गई हैं। इससे आयोगों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका थी।
इसी मुद्दे को लेकर Rajasthan High Court Advocates Association की ओर से याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता के वकील अनिल कुमार भंडारी ने दलील दी कि जब तक नई नियुक्तियां नहीं होतीं, तब तक मौजूदा अधिकारियों को पद पर बनाए रखना जरूरी है, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने Limaye Case और Urmila Verma vs State of Rajasthan जैसे महत्वपूर्ण मामलों का हवाला दिया। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जब तक नई भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान अधिकारियों को कार्य जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है।
कोर्ट ने पाया कि इन मामलों के आधार पर पहले भी अंतरिम राहत दी जा चुकी है और वर्तमान परिस्थिति में भी वही सिद्धांत लागू होते हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
जिन अधिकारियों को कार्यमुक्त कर दिया गया है, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए
जो अधिकारी कार्यमुक्त होने वाले हैं, उन्हें अगले आदेश तक पद से न हटाया जाए
नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक सभी अधिकारी अपने पदों पर बने रहेंगे
इस आदेश से राज्य के उपभोक्ता आयोगों में कामकाज की निरंतरता बनी रहेगी और लंबित मामलों के निपटारे में बाधा नहीं आएगी।
कोर्ट ने पुनर्नियुक्ति के नियमों पर भी स्पष्टता दी है। आदेश के अनुसार:
अध्यक्ष और न्यायिक सदस्यों को पुनर्नियुक्ति के लिए लिखित और मौखिक परीक्षा से छूट दी जा सकती है
गैर-न्यायिक सदस्यों के लिए चयन प्रक्रिया अनिवार्य होगी
जिनका चयन हो चुका है लेकिन नियुक्ति नहीं हुई, उन्हें स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलेगा
इस फैसले से उपभोक्ता आयोगों में लंबित मामलों की सुनवाई जारी रह सकेगी। यदि अधिकारियों को हटाया जाता, तो न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो सकती थी और आम उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में देरी होती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश प्रशासनिक शून्यता (administrative vacuum) को रोकने के लिए बेहद जरूरी था। इससे आयोगों की कार्यक्षमता बनी रहेगी और न्यायिक प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रहेगी।
इस आदेश के बाद अब राज्य सरकार पर जल्द से जल्द नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का दबाव भी बढ़ गया है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि यह राहत केवल अंतरिम है और स्थायी समाधान के लिए नियमों में संशोधन और नियुक्तियां जरूरी हैं।
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