उन्नाव। उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्नाव में आयोजित धर्मसभा के दौरान हिंदू पहचान और गौसंरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हर हिंदू का एक गोत्र होता है और जिसका गोत्र नहीं होता, वह हिंदू हो ही नहीं सकता। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
रविवार सुबह शंकराचार्य महाराज अपने परिकरों के साथ रायबरेली से उन्नाव के लिए रवाना हुए। सुबह 6:45 बजे की पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने हाल ही में ट्रेन में हुए आशुतोष पर हमले की घटना की जांच कराने और पीड़ित को पुलिस सुरक्षा देने की मांग भी की।
पत्रकारों द्वारा जब उन्हें ट्रेन में हिस्ट्रीशीटर आशुतोष पर हुए हमले की जानकारी दी गई तो शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने भी इस घटना के वीडियो और खबरें सोशल मीडिया पर देखी हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे कोच के अटेंडेंट के अनुसार आशुतोष बाथरूम जाने से पहले ठीक था, लेकिन बाहर आते ही वह लहूलुहान हालत में दिखाई दिया।
शंकराचार्य ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ऐसा है तो इस घटना की पूरी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
रायबरेली से निकलने के बाद शंकराचार्य का काफिला लालगंज पहुंचा, जहां उन्होंने मां दुर्गा और दुखभंजन हनुमान मंदिर में दर्शन किए। मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदू समाज की पहचान और परंपराओं पर विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा कि भारत में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जैसे कई वर्ग हो सकते हैं, लेकिन सभी हिंदुओं की पहचान उनके गोत्र से होती है। उनके अनुसार गोत्र केवल एक पारिवारिक पहचान नहीं बल्कि धर्म और संस्कृति का प्रतीक है।
शंकराचार्य ने गोत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘गो’ का अर्थ गाय और ‘त्र’ का अर्थ उसकी रक्षा करना होता है। उनके अनुसार हिंदू वही है जो गौमाता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहता है। उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि हिंदू समाज के लिए मातृ स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि आज देश में गायों के साथ अत्याचार हो रहा है और कई स्थानों पर गौहत्या की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के पहले नेताओं ने गौहत्या बंद कराने का वादा किया था, लेकिन आजादी के 78 साल बाद भी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
शंकराचार्य ने कहा कि आज की सरकारें गाय को पशु सूची में रखती हैं, जबकि हिंदू समाज उसे माता मानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सरकारें गौमांस से होने वाली आय को प्राथमिकता देती हैं, जबकि गौसंरक्षण की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज गौभक्तों के वोट और गौहत्या से होने वाली आय के नोट को एक ही तराजू में तौला जा रहा है, जो हिंदू समाज के लिए चिंता का विषय है।
धर्मसभा के दौरान शंकराचार्य ने घोषणा की कि 11 मार्च को दोपहर 2:15 बजे लखनऊ से गौप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जाएगा। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि क्या इस धर्मयुद्ध की आवश्यकता है। इस पर बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया और पूरा पंडाल “गौमाता राष्ट्रमाता” के नारों से गूंज उठा।
सभा के दौरान सुमित यादव ने शंकराचार्य का पादुका पूजन किया। इस अवसर पर राघवेंद्र सिंह, नीरज मिश्रा, सूर्य प्रकाश सिंह, पुनीत यादव, संतोष सिंह और राजेंद्र सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इसके बाद शंकराचार्य उन्नाव पहुंचे, जहां एक बैंक्वेट हॉल में अधिवक्ता सतीश शुक्ला ने उनका पादुका पूजन किया। वहां धर्मसभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के बाद शंकराचार्य होटल सेलिब्रेशन में ठहरे और सोमवार सुबह नैमिषारण्य के लिए रवाना होने का कार्यक्रम तय किया गया।
उन्नाव में आयोजित धर्मसभा के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोत्र, गौसंरक्षण और सरकारों की नीतियों पर तीखी टिप्पणी की। उनके बयान ने हिंदू पहचान, गौहत्या कानून और धार्मिक मुद्दों पर नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में लखनऊ से प्रस्तावित धर्मयुद्ध के शंखनाद के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रहने की संभावना है।
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