जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर में एक किसान की मौत के बाद अस्पताल में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में हाथापाई और मारपीट का वीडियो भी सामने आ गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना में बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया और अस्पताल स्टाफ के बीच विवाद होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
घटना बासनी थाना क्षेत्र स्थित मेडिप्लस हॉस्पिटल की बताई जा रही है। रविवार रात करीब 8 बजे से शुरू हुआ विवाद देर रात तक चलता रहा। किसान की मौत के बाद बिल और शव देने को लेकर अस्पताल स्टाफ और परिजनों के बीच बहस हुई, जो बाद में हाथापाई तक पहुंच गई।
घटना के बाद सोमवार सुबह से बिश्नोई समाज के लोग अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।
जानकारी के अनुसार भोजाकोर गांव निवासी 70 वर्षीय किसान सुखराम बिश्नोई की रविवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उनके परिजन उन्हें इलाज के लिए जोधपुर के मेडिप्लस हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज शुरू करने से पहले 12 हजार रुपए जमा करवाने को कहा और बाकी खर्च सरकारी योजना में होने की बात कही। इसके बाद किसान का इलाज शुरू किया गया, लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
किसान की मौत के बाद अस्पताल में माहौल तनावपूर्ण हो गया और शव को लेकर विवाद शुरू हो गया।
बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया का आरोप है कि किसान की मौत की सूचना मिलने के बाद वह रात करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचे थे। वहां पहुंचने पर परिजनों ने बताया कि अस्पताल स्टाफ 1 लाख रुपए जमा करने के बाद ही शव देने की बात कह रहा है।
देवेंद्र बूड़िया ने कहा कि जब उन्होंने अस्पताल स्टाफ से इस बारे में सवाल पूछा कि पैसे के लिए शव को क्यों रोका जा रहा है, तो स्टाफ और सिक्योरिटी इंचार्ज ने उनसे बदतमीजी शुरू कर दी।
उनका आरोप है कि जब वह अस्पताल से बाहर निकलने लगे तो स्टाफ के कुछ लोग उनकी गाड़ी तक पहुंच गए और गाली-गलौज करने लगे।
देवेंद्र बूड़िया के अनुसार जब वह अपनी थार गाड़ी में बैठने लगे तो कुछ लोग वहां आ गए और अचानक गाड़ी का गेट तेजी से बंद कर दिया, जिससे उन्हें चोट लग गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट की।
वहीं उनके साथ मौजूद दिनेश नाम के व्यक्ति ने भी अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिनेश का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण किसान की मौत हुई है।
दिनेश के मुताबिक जब उन्होंने विरोध किया तो अस्पताल स्टाफ ने पहले उन्हें इंतजार करने के लिए कहा। लेकिन जब वे गाड़ी के पास पहुंचे तो वहां कई युवक आ गए और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई।
दिनेश ने कहा कि ये सभी लोग अस्पताल के सुरक्षा कर्मी या उनसे जुड़े लोग थे, जो सुरक्षा देने के नाम पर गुंडागर्दी करते हैं।
दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को गलत बताया है। हॉस्पिटल अधीक्षक का कहना है कि विवाद के दौरान देवेंद्र बूड़िया ने अस्पताल के एक कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में किसी भी तरह से शव रोककर पैसे मांगने की बात गलत है और मामले की जांच की जानी चाहिए।
इस पूरे विवाद के दौरान अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना का कुछ हिस्सा कैद हो गया है। वीडियो में कुछ लोग बहस और धक्का-मुक्की करते दिखाई दे रहे हैं।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
घटना के बाद सोमवार सुबह से बिश्नोई समाज के लोग अस्पताल के बाहर एकत्रित हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। समाज के लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
दोपहर करीब 1 बजे समाज के प्रतिनिधि बासनी थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दी। उन्होंने कहा कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
जोधपुर के मेडिप्लस हॉस्पिटल में किसान की मौत के बाद हुआ यह विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ बिश्नोई समाज अस्पताल स्टाफ पर मारपीट और पैसे मांगने का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन भी अपने कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार का दावा कर रहा है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे विवाद में असल में गलती किसकी थी।
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