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क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? तेल कंपनियों को रोज़ 1000 करोड़ का नुकसान, सरकार पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होने से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

सूत्रों के अनुसार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। अगर इसे दैनिक आधार पर देखा जाए तो कंपनियां हर दिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का घाटा झेल रही हैं।

तेल कंपनियों के इस भारी नुकसान के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कंपनियां कब तक पेट्रोल, डीजल और गैस पर घाटा सहती रहेंगी? पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में जब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है और घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखी जाती हैं, तो इसका सीधा असर तेल कंपनियों की कमाई पर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल सरकार की ओर से तेल कंपनियों को राहत देने या घाटे की भरपाई करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में कंपनियों की अंडर-रिकवरी तेजी से बढ़ रही है। अंडर-रिकवरी का मतलब है कि जिस कीमत पर तेल कंपनियां ईंधन खरीद रही हैं और जिस कीमत पर ग्राहकों को बेच रही हैं, उसके बीच का घाटा लगातार बढ़ रहा है।

बताया जा रहा है कि तेल कंपनियां लंबे समय से सरकार से कीमतों में संशोधन की मांग कर रही हैं। हालांकि, आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ने की आशंका के कारण सरकार अब तक कीमतों में बढ़ोतरी से बचती रही है। लेकिन मौजूदा हालात में तेल कंपनियों के लिए घाटा सहना मुश्किल होता जा रहा है।

एलपीजी सिलेंडर के मामले में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। पिछले वर्षों में सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर पर तेल कंपनियों को राहत देने के लिए सब्सिडी और अन्य आर्थिक सहायता प्रदान की थी। माना जा रहा है कि इस बार भी सरकार कुछ राहत पैकेज पर विचार कर सकती है, ताकि घरेलू गैस की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल न आए।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाने-पीने की वस्तुओं, रोजमर्रा के सामान और अन्य सेवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इससे महंगाई दर में तेजी आने की आशंका बढ़ जाएगी।

इधर, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और तेल उत्पादक देशों की उत्पादन नीतियां भी कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। कई देशों में आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले कुछ सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती है, तो सरकार और तेल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचेंगे।

फिलहाल आम लोगों की नजर सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हुई है। देशभर में लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या जल्द ही पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ने वाली हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में स्थिर ईंधन दरों के कारण सरकारी तेल कंपनियां भारी घाटे में चल रही हैं। हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रहीं कंपनियों के लिए मौजूदा स्थिति लंबे समय तक संभालना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना तेज हो गई है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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