राजस्थान में राज्यसभा चुनाव 2026 की अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, बीजेपी सांसद राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें से 2 सीटें बीजेपी के लिए और 1 सीट कांग्रेस के लिए जाने की संभावना है। नामांकन फॉर्म दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून है, लेकिन प्रत्याशियों के नामों को लेकर सस्पेंस बरकरार है।
बीजेपी में प्रारंभिक विचारों में तीसरे प्रत्याशी को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। दावेदारों में सामान्य और ओबीसी वर्ग पर अधिक फोकस दिख रहा है। संभावित नामों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व हरियाणा प्रभारी सतीश पूनिया शामिल हैं। सतीश पूनिया को हरियाणा में पार्टी की जीत और अन्य रणनीतिक योगदान के कारण उच्च सदन में भेजने पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा बीजेपी की राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर और पूर्व सांसद जसकौर मीणा की पुत्री अर्चना मीणा के नाम की भी चर्चा है। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के परिवार के सदस्यों, जैसे बेटी सुनीता बैंसला और विजय बैंसला, को लेकर भी मंथन चल रहा है। विजय बैंसला के माध्यम से पार्टी एक बड़े वोटबैंक को साध सकती है।
कांग्रेस में उम्मीदवार चयन में सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान दिया जा रहा है। गोविंद डोटासरा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अनुसूचित जाति वर्ग का संदेश दे रहे हैं। इस दौड़ में सबसे मजबूत नाम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी माना जा रहा है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रही रेहाना रियाज का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में दोनों प्रमुख पार्टियों का उद्देश्य न केवल सामाजिक और वर्गीय संतुलन बनाए रखना है, बल्कि राज्य में राजनीतिक संतुलन और केंद्र में पार्टी की मजबूत स्थिति सुनिश्चित करना भी है। इस प्रक्रिया के दौरान दावेदारों के चयन और रणनीति पर लगातार मंथन जारी है।
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