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“चूहे खा गए रिश्वत के नोट!” सुप्रीम कोर्ट भी चौंका, सबूत गायब तो मिली जमानत

देश: की न्यायिक प्रणाली में कभी-कभी ऐसे मामले सामने आते हैं, जो न केवल चौंकाते हैं बल्कि व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करते हैं। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट में सामने आया, जहां रिश्वत के केस में मुख्य सबूत—जब्त नकदी—के बारे में दावा किया गया कि उसे चूहों ने कुतर दिया। इस असामान्य दलील ने अदालत को भी हैरान कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बिहार से जुड़ा है, जहां चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर के पद पर तैनात अरुणा कुमारी पर रिश्वत लेने का आरोप था। उन पर 10,000 रुपये की रिश्वत मांगने और लेने का मामला दर्ज किया गया था।

इस केस में उन्हें निचली अदालत से दोषी ठहराया गया और बाद में पटना उच्च न्यायालय ने भी सजा को बरकरार रखा। लेकिन जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

‘चूहे खा गए नोट’—सबूत ही गायब

सुनवाई के दौरान बताया गया कि रिश्वत के रूप में जब्त किए गए नोट पुलिस के मालखाने में रखे गए थे। लेकिन जब उन्हें अदालत में पेश करने की बारी आई, तो पाया गया कि वे नोट पूरी तरह से कुतरे हुए थे।

दलील दी गई कि चूहों ने उन नोटों को नष्ट कर दिया, जिससे केस का सबसे अहम भौतिक साक्ष्य ही खत्म हो गया। यह सुनकर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने की।

पीठ ने कहा कि इस तरह साक्ष्यों का गायब होना कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर चोट है।

न्यायाधीशों ने यह भी टिप्पणी की कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जहां चूहों द्वारा साक्ष्य नष्ट होने की बात सामने आई हो। इससे पहले भी नशीले पदार्थों और नकदी के मामलों में ऐसे दावे किए जा चुके हैं।

महिला को मिली जमानत

महिला के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि जब मुख्य साक्ष्य ही मौजूद नहीं है, तो सजा को जारी रखना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब मामला अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।

इन दलीलों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महिला की सजा को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया और उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

सिस्टम पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस और साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मालखानों में रखे गए सबूतों की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार चिंता जताई जा चुकी है।

अगर महत्वपूर्ण साक्ष्य इस तरह नष्ट हो जाते हैं, तो न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है और दोषियों को सजा दिलाना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिशा में सख्त निगरानी और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है।

आगे क्या होगा?

हालांकि महिला को फिलहाल जमानत मिल गई है, लेकिन मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। अंतिम सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि दोषसिद्धि बरकरार रहेगी या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस को भी अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दी है कि साक्ष्यों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरती जाए।


निष्कर्ष:

‘चूहे खा गए रिश्वत के पैसे’ जैसी दलील न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि यह न्याय प्रणाली की खामियों को भी उजागर करती है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस बात का संकेत है कि बिना ठोस साक्ष्य के किसी को लंबे समय तक सजा में रखना उचित नहीं है। साथ ही, यह मामला भविष्य में साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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