दौसा: में सोमवार को ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत एक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में गौ सेवकों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने गोमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने सहित कुल 18 प्रमुख मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया।
रैली की शुरुआत नेहरू गार्डन से हुई, जहां से गौ भक्त हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। पूरे रास्ते ‘गौ माता की जय’ और ‘गौ रक्षा करो’ जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने संजू मीणा को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में हजारों लोगों के हस्ताक्षर शामिल थे।
ज्ञापन में प्रमुख मांग यह रही कि गोमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिया जाए और देशभर में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए। साथ ही गौ तस्करी रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की भी मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई ठोस सुझाव भी रखे। इनमें हर राज्य में वन भूमि या गोचर भूमि पर कम से कम एक गौ अभ्यारण्य स्थापित करने की मांग प्रमुख रही।
इसके अलावा हर ग्राम पंचायत स्तर पर निराश्रित गौवंश के लिए नंदीशाला खोलने, गोशालाओं को मनरेगा से जोड़ने और वहां काम करने वालों को रोजगार देने की बात कही गई।
गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बिजली बिल में छूट या मुफ्त यूनिट देने का प्रस्ताव भी ज्ञापन में शामिल किया गया।
गौ हत्या और तस्करी से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में आजीवन कारावास का प्रावधान होना चाहिए।
इसके अलावा तस्करी में उपयोग किए जाने वाले वाहनों को जब्त कर उनकी नीलामी या गोशालाओं को देने की मांग भी उठाई गई।
CSR फंड के जरिए गौ सेवा के लिए अनिवार्य बजट तय करने और सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध लगाने की भी मांग रखी गई।
गौ सेवा को शिक्षा और स्वास्थ्य से जोड़ने के लिए भी कई सुझाव दिए गए। प्रदर्शनकारियों ने जिला स्तर पर पंचगव्य अस्पताल खोलने, स्कूलों में देशी गाय के दूध को मिड डे मील में शामिल करने और पाठ्यक्रम में गौ आधारित ज्ञान को जोड़ने की मांग की।
इसके अलावा हाइवे पर होने वाली गौ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर 50 किलोमीटर पर गौ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया गया।
इस रैली में शामिल लोगों ने कहा कि गौ संरक्षण सिर्फ धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण, कृषि और अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा मुद्दा है।
गौ सेवकों का मानना है कि यदि इन मांगों पर अमल किया जाता है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पशुधन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
पूरे प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था बनी रही। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में रैली का आयोजन किया गया।
रैली के जरिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि गौ संरक्षण को लेकर देशभर में एक मजबूत जनभावना मौजूद है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दौसा में निकली यह रैली गौ संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता और जनसमर्थन का बड़ा उदाहरण है। ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने से लेकर कानून और व्यवस्थागत सुधारों तक, प्रदर्शनकारियों की मांगें व्यापक और दूरगामी प्रभाव वाली हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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