भारत: और न्यूजीलैंड के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) सोमवार को आधिकारिक रूप से लागू हो गया, जिसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। इस समझौते के तहत अब भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत टैक्स-फ्री पहुंच मिलेगी, जिससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के उनके समकक्ष टॉड मैक्ले की मौजूदगी में किए गए। दोनों देशों के बीच यह डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, रोजगार और निवेश के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव लाने वाली है।
इस एफटीए की सबसे खास बात इसकी तेज रफ्तार रही। 16 मार्च 2025 को शुरू हुई बातचीत को महज 9 महीनों में पूरा कर लिया गया। आमतौर पर ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों में कई साल लग जाते हैं, लेकिन इस बार दोनों देशों ने तेजी से सहमति बनाकर इसे अमल में लाया।
समझौते के लागू होते ही भारत को न्यूजीलैंड के सभी टैरिफ उत्पादों पर शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। पहले जिन 450 से अधिक उत्पादों पर करीब 10 प्रतिशत तक टैक्स लगता था, अब वह पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी बनेगी और निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है।
इस एफटीए का सबसे ज्यादा फायदा भारत के टेक्सटाइल, लेदर, सिरेमिक, कालीन और ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन क्षेत्रों के उत्पाद अब न्यूजीलैंड में सस्ते और ज्यादा आकर्षक बनेंगे।
वहीं, भारत ने भी न्यूजीलैंड से आने वाले करीब 95 प्रतिशत उत्पादों पर टैरिफ में छूट दी है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय के तहत भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य घरेलू किसानों और डेयरी उद्योग को सुरक्षित रखना है।
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और अन्य विकास क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने में मदद करेगा।
यह एफटीए सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए भी बड़ा मौका लेकर आया है।
इन प्रावधानों से भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर के रास्ते और आसान हो जाएंगे।
इस समझौते पर पीयूष गोयल ने कहा कि यह बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड ने एक-दूसरे को रणनीतिक साझेदार के रूप में चुना है और यह समझौता दोनों देशों के बीच विश्वास और साझा दृष्टिकोण को दिखाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह उनका सातवां एफटीए है और आने वाले समय में यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ भी ऐसे समझौते होने की उम्मीद है।
यह एफटीए भारत को वैश्विक बाजार में नई पहचान देगा। जहां एक ओर निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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