नई दिल्ली: देश की प्रमुख एयरलाइन Air India ने अपने ऑपरेशन्स में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। कंपनी आने वाले विंटर शेड्यूल से रोजाना करीब 100 उड़ानों को बंद करने जा रही है, जो कुल उड़ानों का लगभग 10% हिस्सा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब एयरलाइन इंडस्ट्री बढ़ती लागत और तकनीकी चुनौतियों से जूझ रही है।
एयर इंडिया के इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं—पहला, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लगातार बढ़ती कीमतें और दूसरा, पुराने विमानों के लिए स्पेयर पार्ट्स की कमी। ATF की कीमतें एयरलाइन की कुल ऑपरेटिंग लागत का करीब 40% हिस्सा होती हैं, ऐसे में इसके महंगे होने का सीधा असर एयरलाइन की कमाई पर पड़ता है।
इसके अलावा, कंपनी के लगभग 30 वाइड-बॉडी विमान फिलहाल ग्राउंडेड हैं, क्योंकि उनके लिए जरूरी इंजन और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इससे एयरलाइन की उड़ान क्षमता प्रभावित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस कटौती का सबसे ज्यादा असर इंटरनेशनल रूट्स पर पड़ेगा। खासकर San Francisco, Chicago, London और Sydney जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानों की संख्या घटाई जाएगी।
जहां अभी रोजाना फ्लाइट्स संचालित होती हैं, वहां अब सप्ताह में केवल 4-5 दिन ही सेवा उपलब्ध हो सकती है। इससे यात्रियों को यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

केवल अंतरराष्ट्रीय ही नहीं, घरेलू रूट्स पर भी एयर इंडिया अपनी रणनीति बदलने जा रही है। मेट्रो शहरों के बीच चलने वाली कई डेली फ्लाइट्स की संख्या कम की जाएगी। इसका उद्देश्य विमानों का बेहतर उपयोग करना और ज्यादा मुनाफे वाले रूट्स पर ध्यान केंद्रित करना है।
एयर इंडिया ने Boeing और Airbus से नए विमानों के बड़े ऑर्डर दिए हैं। हालांकि, इनकी डिलीवरी में अभी समय लगेगा। तब तक एयरलाइन को अपने मौजूदा बेड़े के साथ ही संचालन करना होगा, जिससे फ्लाइट्स में कटौती एक मजबूरी बन गई है।
एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “हम लगातार मार्केट डिमांड और ऑपरेशनल चुनौतियों की समीक्षा कर रहे हैं। यह फैसला अस्थायी है, लेकिन जरूरी भी।”
एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। बढ़ती लागत, वैश्विक सप्लाई चेन की दिक्कतें और तकनीकी बाधाएं इंडस्ट्री को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में फ्लाइट्स कम करना एक रणनीतिक कदम हो सकता है।
इस फैसले का सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा।
हालांकि, एयरलाइन का दावा है कि इस कदम से ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) में सुधार होगा और यात्रियों को बेहतर सेवा मिलेगी।
एयर इंडिया का रोजाना 100 उड़ानें कम करने का फैसला केवल एक ऑपरेशनल बदलाव नहीं, बल्कि मौजूदा वैश्विक एविएशन संकट की झलक है। बढ़ती लागत और संसाधनों की कमी के बीच एयरलाइन अपने संचालन को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में नए विमानों की डिलीवरी और फ्यूल कीमतों में स्थिरता इस स्थिति को सुधार सकती है।
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