चूरू जिले के निकटवर्ती डोकवा गांव का माहौल बुधवार को पूरी तरह गमगीन हो गया, जब भारतीय सेना के जवान सत्येंद्र महलां (30) का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जवान की अचानक हृदय गति रुकने से हुई असमय मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बुधवार शाम को उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
जानकारी के अनुसार, सत्येंद्र महलां भारतीय सेना में 11 वर्षों से सेवा दे रहे थे और 8 गार्ड रेजिमेंट में तैनात थे। वे 10 जून को छुट्टी लेकर अपने गांव डोकवा आए थे। बुधवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए, जिसके बाद हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। उनकी असामयिक मौत ने परिवार और पूरे गांव को सदमे में डाल दिया।
अंतिम संस्कार के लिए बीकानेर से 14 आर्मर्ड रेजिमेंट की टुकड़ी गांव पहुंची। जेसीओ शीशराम और नायक राकेश कुमार के नेतृत्व में जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी अर्पित की। इसके बाद तिरंगा परिजनों को सौंपा गया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पूर्व विधायक नंदलाल पूनिया, एसडीएम मनोज खेमादा, पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष सूबेदार मुकेश कुमार सहित कई पूर्व सैनिक और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने के लिए गांव के युवाओं ने शहीद स्मारक से डोकवा गांव तक तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में तिरंगा लेकर युवा “सत्येंद्र अमर रहे” के जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। देशभक्ति गीतों के बीच पूरा गांव भावुक माहौल में अपने लाडले को अंतिम विदाई देता नजर आया।
गांव के लोगों के अनुसार सत्येंद्र महलां मिलनसार और प्रेरणादायी स्वभाव के थे और युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उनके पिता मुंशीराम महलां भी भारतीय सेना में सेवा दे चुके थे और उनका निधन दो वर्ष पूर्व हो चुका है। सत्येंद्र अपने पीछे 18 महीने के पुत्र को छोड़ गए हैं।
उनकी अचानक मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है, कई घरों में उस दिन चूल्हे तक नहीं जले और पूरा इलाका शोक में डूबा रहा।
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