राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र—सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों—के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यमुना जल परियोजना के तहत अब इस पूरे इलाके को यमुना का पानी उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हो गया है। करीब 32 साल बाद राजस्थान को अपने हिस्से का जल मिलने जा रहा है, जिससे लगभग 75 लाख लोगों को पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे। परियोजना की लागत लगभग 34,102 करोड़ रुपये तय की गई है।
इस योजना के तहत हथिनीकुंड बैराज से लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिसके जरिए यमुना का पानी राजस्थान पहुंचेगा। चूरू जिले के हंसियावास में एक बड़ा जलाशय बनाया जाएगा, साथ ही आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली, निरीक्षण सड़कें और तीन प्रमुख पाइपलाइनें विकसित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम बताते हुए कहा कि यह समझौता राजस्थान के जल भविष्य की गारंटी है। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
हालांकि राजनीतिक स्तर पर इस समझौते को लेकर प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं, जहां सत्तापक्ष इसे ऐतिहासिक कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष ने डीपीआर और जल उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए हैं।
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