यह अभियान 1 जुलाई को दौसा में लग्जरी बस में आग लगने से आठ लोगों की दर्दनाक मौत के बाद शुरू किया गया। राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देश पर न्यायिक अधिकारी स्वयं सड़कों पर उतरकर बसों की जांच कर रहे हैं। जांच में कई बसों में केवल एक इमरजेंसी एग्जिट, अवैध रूप से बदला गया स्लीपर लेआउट, अतिरिक्त सामान रखने के लिए यात्रियों की जगह कम करना, तय मानकों से अधिक ओवरहैंग और अन्य गंभीर खामियां मिली हैं।
कार्रवाई के बाद प्रदेशभर की बस वर्कशॉप में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। हजारों बस ऑपरेटर अपनी गाड़ियों को परिवहन विभाग के सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाने में जुटे हैं। जांच के दौरान फर्जी रजिस्ट्रेशन और दूसरे राज्यों में पंजीकृत बसों के संचालन जैसी अनियमितताएं भी सामने आई हैं, जिन पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना है।
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