मीडिया से बातचीत में मदन राठौड़ ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर कई दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के लिए विदेशों से फंडिंग की गई। साथ ही कहा कि छात्रों के हाथों में कलम और किताब होती है, पत्थर नहीं। उनका दावा था कि पत्थरबाजी करने वाले प्रशिक्षित लोग थे।
राठौड़ ने यह भी कहा कि अस्पताल में भर्ती घायलों से मिली जानकारी के अनुसार उनमें एक भी छात्र शामिल नहीं था। उन्होंने दावा किया कि आने वाले कुछ दिनों में पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले को लेकर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार है और राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
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