जयपुर। राजधानी जयपुर के जेडीए ज़ोन-10 अंतर्गत भावगढ़ बंध्या क्षेत्र में इकोलॉजिकल ज़ोन की करीब 42 बीघा कृषि भूमि पर 'अयोध्या नगर' नाम से कथित रूप से कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि बिना भू-रूपांतरण और आवश्यक स्वीकृतियों के प्लॉटिंग और विला निर्माण खुलेआम जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई अब तक दिखाई नहीं दे रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी में सड़कें तैयार की जा चुकी हैं, प्लॉट काटे जा रहे हैं और विला निर्माण भी तेज़ी से चल रहा है। सवाल यह है कि यदि यह सब नियमों के विरुद्ध हो रहा है तो संबंधित विभाग अब तक मूकदर्शक क्यों बना हुआ है?
सूत्रों के अनुसार यहां भूखंड करीब 42 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की दर से बेचे जा रहे हैं। यदि कॉलोनी के पास आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां नहीं हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान उन लोगों को होगा जो अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां निवेश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो रही। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह कॉलोनी पूरी तरह वैध है तो उसकी स्वीकृतियां सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रहीं? और यदि वैध नहीं है तो फिर निर्माण कार्य आखिर किसकी शह पर जारी है? क्या जेडीए किसी बड़ी कार्रवाई का इंतजार कर रहा है या फिर नियम केवल आम लोगों के लिए हैं?
यह मामला सिर्फ एक कॉलोनी का नहीं, बल्कि सरकारी नियमों की विश्वसनीयता, इकोलॉजिकल ज़ोन की सुरक्षा और आम लोगों की मेहनत की कमाई से जुड़ा है। अब निगाहें जेडीए पर हैं कि वह इस मामले में जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
(यदि संबंधित कॉलोनी डेवलपर, जेडीए या किसी अन्य पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होता है तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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