बांसवाड़ा के घाटोल उपखंड के 64 गांवों में सात हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई के लिए बनाई गई खमेरा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना करीब छह साल तक अटकी रहने के बाद अब गतिशील हो गई है। 2012-13 में 136 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई इस स्प्रिंकलर बेस्ड प्रणाली के तहत माही डेम से निकलती 28.5 किमी की कैनाल से 14 किमी दूरी तक खमेरा क्षेत्र में पानी पहुंचाने का लक्ष्य था।
परियोजना में सबसे बड़ी चुनौती बीच में बनने वाली दो टनलों की रही। पहली छोटी टनल (300 मीटर) पूरी हो गई थी, लेकिन दूसरी लंबी टनल (1700 मीटर) और बीच में वेल का कार्य ठेकेदार द्वारा बीच में छोड़ दिया गया था, जिससे परियोजना अटकी रही। टनल में सीपेज और भराव होने के कारण पुनः कार्य करना पड़ा।
विभागीय अधिशासी अभियंता हंसराम मीणा के अनुसार, अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए नौ करोड़ रुपए का नया ठेका दिया गया और परियोजना का काम अब जारी है। परियोजना के अन्य कार्य जैसे इंटेक वेल, डिग्गी निर्माण, पाइप लाइन बिछाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है। नई समयसीमा के अनुसार यह परियोजना नवंबर तक पूरी होने की संभावना है।
परियोजना के पूरा होने से घाटोल उपखंड के 64 गांवों की सात हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुनिश्चित होगी और किसानों को पर्याप्त जल मिलेगा।
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