राजधानी जयपुर के शिवदासपुरा थाना क्षेत्र में व्यापारी हरिशंकर शर्मा (40) की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि करीब एक करोड़ रुपये की उधारी चुकाने से बचने के लिए मृतक के दोस्त सीताराम शर्मा और उसके साढ़ू संदीप शर्मा ने इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या के बाद आरोपी करीब 18 घंटे तक शव को कार की डिक्की में लेकर जयपुर और आसपास के इलाकों में घूमते रहे और उसे ठिकाने लगाने की कोशिश करते रहे।
पुलिस के अनुसार 13 जून की शाम हरिशंकर शर्मा पैसों के लेन-देन को लेकर सीताराम शर्मा के पास पहुंचे थे। उस समय वहां सीताराम का साढ़ू संदीप शर्मा भी मौजूद था। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और झगड़ा होने लगा। पुलिस जांच में सामने आया कि विवाद के दौरान हरिशंकर ने सीताराम की उंगली काट ली। इससे गुस्साए सीताराम ने हरिशंकर के निजी अंग पर जोरदार लात मार दी। गंभीर दर्द के कारण हरिशंकर जमीन पर गिर पड़ा और उसका सिर चौखट से टकरा गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
मौत होने के बाद दोनों आरोपी घबरा गए और सबूत मिटाने की कोशिश में जुट गए। उन्होंने शव को सबसे पहले हॉस्टल के बेसमेंट में रखे भूसे के बीच छिपा दिया। अगले दिन शव को प्लास्टिक के कट्टे में बांधकर एक परिचित की कार की डिक्की में रख दिया गया। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में दोनों आरोपी शव को कार में रखने के बाद घर के बाहर लगी पानी की टंकी पर हाथ धोते हुए दिखाई दिए। इसके बाद सीताराम कार लेकर निकल गया जबकि संदीप वापस घर के अंदर चला गया।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी शव को ठिकाने लगाने के लिए कई स्थानों पर गए, लेकिन लोगों की आवाजाही और पकड़े जाने के डर से शव को कहीं फेंक नहीं सके। करीब 18 घंटे तक शव कार की डिक्की में पड़ा रहा। मामला तब खुला जब कार मालिक ने अपनी गाड़ी वापस मांगी। कई बार टालमटोल करने के बाद सीताराम ने कार मालिक को बताया कि उसकी गाड़ी में एक व्यक्ति का शव रखा हुआ है। यह सुनकर घबराए कार मालिक ने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी।
सूचना मिलते ही शिवदासपुरा थाना पुलिस सक्रिय हुई और जांच शुरू की। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में आरोपी शव को कार में रखते और बाद में हाथ धोते हुए दिखाई दिए। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
जयपुर दक्षिण के डीसीपी राजर्षि राज वर्मा ने बताया कि दोनों आरोपी हॉस्टल व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। सीताराम तीन हॉस्टल संचालित करता है, जबकि उसका साढ़ू संदीप किराए पर हॉस्टल चलवाता है। जांच में सामने आया कि संदीप ने मृतक हरिशंकर शर्मा से करीब 50 लाख रुपये नकद उधार लिए थे। इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये का बिल्डिंग मटेरियल भी लिया गया था। कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ रुपये का लेन-देन था। इसी आर्थिक विवाद और उधारी के दबाव से बचने के लिए हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है। जांच एजेंसियां आर्थिक लेन-देन, घटनाक्रम और अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
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