राजस्थान के भरतपुर जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण लोग अब पारंपरिक वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 1832 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की जा चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 125 करोड़ रुपए से अधिक है।
विभागीय आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक वर्ष के दौरान जिले में 1181 नए इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर उतरे हैं। वहीं वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 527 नए इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जिले में ईवी को लेकर लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है और इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं। ईवी से वायु प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है। बढ़ते प्रदूषण के दौर में यह स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भरतपुर जिले में बिके कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में दोपहिया वाहनों की मांग सबसे अधिक रही है। आंकड़ों के अनुसार अब तक 1694 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदे जा चुके हैं, जबकि 138 इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके अलावा ई-रिक्शा और अन्य व्यावसायिक इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
ईवी अपनाने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि पारंपरिक वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन अधिक किफायती साबित हो रहे हैं। कृष्णा नगर निवासी अनिल चौधरी ने बताया कि पहले उनकी बाइक पर हर महीने 5 से 7 हजार रुपए तक पेट्रोल खर्च होता था, लेकिन ईवी स्कूटर खरीदने के बाद खर्च में काफी कमी आई है। वहीं रणजीत नगर निवासी जितेंद्र सिंह का कहना है कि रोजमर्रा की यात्रा के लिए इलेक्ट्रिक वाहन सबसे सुविधाजनक और किफायती विकल्प बनकर उभरा है।
गोपालगढ़ निवासी सतीश अग्रवाल ने बताया कि शुरुआत में उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने को लेकर संकोच था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि इलेक्ट्रिक कार और स्कूटी खरीदने का फैसला सही साबित हुआ है। इससे खर्च में बचत होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिल रहा है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, करों में छूट और जागरूकता अभियानों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। भरतपुर के जिला परिवहन अधिकारी अभय मुद्गल के अनुसार जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोग इन्हें भरोसेमंद व किफायती विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बैटरी तकनीक में सुधार, चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार और कम परिचालन लागत के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और अधिक बढ़ेगी। यही वजह है कि ईवी अब भविष्य के परिवहन का मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
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