अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने गुरुवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में भारतीय खान ब्यूरो (IBM), GSI और माइंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में यह निर्देश दिए।
अपर्णा अरोरा ने कहा कि राज्य सरकार का फोकस प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा के बेहतर दोहन, खनिज खोज कार्य को गति देने, अकार्यशील खानों में दोबारा खनन शुरू कराने तथा रोजगार और राजस्व के नए अवसर विकसित करने पर है।
क्वार्टज-फेल्सपार को माइनर मिनरल से मेजर मिनरल घोषित किए जाने के बाद की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी शेष लीजों का भारतीय खान ब्यूरो (IBM) के साथ समन्वय कर 15 दिनों में पंजीकरण कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने IBM को क्वार्टज-फेल्सपार की सैंपलिंग और विश्लेषण प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार क्वार्टज-फेल्सपार ब्लॉकों में प्राथमिकता के आधार पर G3 एक्सप्लोरेशन कराने के निर्देश दिए।
एसीएस माइंस ने महत्वपूर्ण खनिजों के दोहन के बाद बचे खनिज मलबे पर भी रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) कराने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे खनिज मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सकेगा और यह भी पता लगाया जा सकेगा कि उसमें किसी उपयोगी खनिज की उपलब्धता है या नहीं।
बैठक में भारतीय खान ब्यूरो, उदयपुर के नियंत्रक अभय अग्रवाल ने प्रस्तुति के माध्यम से राजस्थान के माइनिंग सेक्टर में हो रहे कार्यों और खनिज भंडार की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि खान ब्यूरो स्तर पर मेजर मिनरल लीज धारकों के माइनिंग प्लान का अनुमोदन प्राथमिकता से किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने माइनिंग प्लान के अनुमोदन के लिए 30 दिनों की समयसीमा भी निर्धारित की है।
अभय अग्रवाल ने राजस्थान में विभिन्न खनिजों के खनन और डिपोजिट्स से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के खनन मंत्रालय के बीच बेहतर तालमेल के साथ ही राजस्थान में कार्यरत केंद्रीय संस्थाओं और खान निदेशालय के समन्वय से प्रदेश के माइनिंग सेक्टर में काम हो रहा है।
बैठक में विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि, निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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