राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) देश की गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है। रामदेवरा में स्थापित संरक्षण प्रजनन केंद्र से अब गोडावण को दोबारा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
मौजूदा योजना के मुताबिक 10 गोडावण रिलीज के लिए उपलब्ध हैं। हालांकि, इनमें से कितने पक्षियों को वास्तव में जंगल में छोड़ा जाएगा, इसका अंतिम निर्णय Wildlife Institute of India (WII) के आकलन और तय प्रोटोकॉल के आधार पर होगा। रामदेवरा और सुदाशरी क्षेत्र को संभावित रिलीज साइट के रूप में चिन्हित किया गया है और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।
गोडावण को प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले वैज्ञानिक मानकों के अनुसार तैयारी की जाएगी। रिलीज के बाद भी पक्षियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था रहेगी। WII की विशेषज्ञ निगरानी में रिलीज प्रोटोकॉल तय किए जाने की जानकारी सामने आई है।
राजस्थान में गोडावण संरक्षण के लिए सम और रामदेवरा में कृत्रिम संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजाति की संख्या बढ़ाने के साथ उसके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापन की दिशा में आगे बढ़ना है।
प्रस्तावित पहल का अहम पहलू यह है कि कैप्टिव-ब्रेड गोडावण को राजस्थान के ही थार क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण में पुनर्स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इससे गोडावण संरक्षण कार्यक्रम अपने अगले चरण यानी रीवाइल्डिंग की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
नोट: 3 अक्टूबर का मुख्यमंत्री दौरा और गोडावण रिलीज कार्यक्रम अभी प्रस्तावित/तैयारी के चरण में है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अंतिम रिलीज साइट, संख्या और मंजूरियां संबंधित विभागों एवं WII की प्रक्रिया के बाद तय होंगी।
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