मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में यह कार्रवाई की जा रही है। सितंबर 2026 में विभिन्न जिलों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए थे। जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला में जांच के बाद कई नमूने असुरक्षित पाए गए।
जांच में असुरक्षित पाए गए उत्पादों में मनुबन, सर्वशुभ, दृष्टि और श्री पार्श्व ब्रांड का घी, नंदी ब्रांड का हल्दी पाउडर, चना दाल, काजू, सनफीस्ट आटा नूडल्स, हनुमान मल्टी सोर्स एडिबल ऑयल, डायरेक्टर ब्रांड का पान मसाला, भोग विनायक घी, श्री पार्वती अमोल घी और यशवी सरस घी शामिल हैं।
इन सभी उत्पादों के संबंधित बैच/पैक साइज के प्रदेश में वितरण, बिक्री और प्रदर्शन पर आगामी दो माह तक रोक लगाई गई है।
लूज खाद्य पदार्थों के नमूने असुरक्षित पाए जाने के बाद दौसा, धौलपुर, भरतपुर, अलवर, जयपुर, टोंक और अजमेर के कुल 19 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
इन प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूनों में मिल्क केक, पनीर, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, कलाकंद, मावा मिठाई/बर्फी, रिफाइंड सोयाबीन ऑयल, लाल मिर्च पाउडर, टोमेटो ग्रेवी, नमकीन, काली मिर्च और घी सहित विभिन्न खाद्य पदार्थ असुरक्षित पाए गए।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग के अनुसार संबंधित खाद्य व्यापारियों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत निर्धारित अवधि में दोबारा जांच के लिए अपील करने का अवसर दिया गया है। यदि अपील के बाद रेफरल प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी असुरक्षित आती है या निर्धारित अवधि में अपील नहीं की जाती है, तो संबंधित खाद्य पदार्थों को रिकॉल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विभाग ने आमजन से अपील की है कि खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता, ब्रांड, बैच नंबर, पैक साइज और लेबल की जांच जरूर करें। संदिग्ध या प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की खरीद और उपयोग से बचने की भी अपील की गई है।
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