जियो ने अपने इस विजन को ‘सॉवरेन सैटेलाइट कनेक्टिविटी’ का नाम दिया है। कंपनी की प्रस्तावित योजना में करीब 1,600 LEO सैटेलाइट का नेटवर्क शामिल है। इस तकनीक के माध्यम से दूरदराज के गांवों, द्वीपों, सीमावर्ती क्षेत्रों और अन्य ऐसे स्थानों तक इंटरनेट व संचार सेवाएं पहुंचाने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं, जहां मौजूदा नेटवर्क सीमित है।
कंपनी का लक्ष्य सैटेलाइट नेटवर्क को अपने मौजूदा मोबाइल और फाइबर नेटवर्क के साथ एकीकृत करना है, ताकि जमीन और अंतरिक्ष आधारित कनेक्टिविटी को एक साथ इस्तेमाल किया जा सके।
इस प्रस्तावित नेटवर्क में 23 ग्राउंड स्टेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये स्टेशन सैटेलाइट नेटवर्क और भारत के जमीनी संचार ढांचे के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद करेंगे।
जियो के विजन में डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग से लेकर सैटेलाइट लॉन्च, तैनाती और संचालन तक पूरी प्रक्रिया पर भारत में नियंत्रण रखने की परिकल्पना शामिल है। कंपनी इसे देश की डिजिटल संप्रभुता और सुरक्षित संचार क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश कर रही है।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में प्रदर्शित योजना के अनुसार, जियो ने देश के 6 लाख से अधिक गांवों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने का विजन रखा है। इसके साथ ही पूरे भौगोलिक क्षेत्र और समुद्री इलाकों में नेटवर्क उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना भी दिखाई गई।
इस पहल के संभावित उपयोगों में ग्रामीण कनेक्टिविटी, दूरस्थ औद्योगिक स्थल, विमानन, समुद्री परिवहन, सरकारी सेवाएं, रक्षा क्षेत्र और आपदा प्रबंधन शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डायरेक्ट-टू-डिवाइस कॉलिंग की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, ये लक्ष्य और उपयोग प्रस्तावित योजना का हिस्सा हैं। वास्तविक उपलब्धता और सेवाओं का विस्तार तकनीकी विकास, नियामकीय मंजूरी और नेटवर्क तैनाती पर निर्भर करेगा।
दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का 10वां संस्करण ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ थीम पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस थीम का उद्देश्य तकनीक और डिजिटल कनेक्टिविटी को पारंपरिक सीमाओं से आगे ले जाने की संभावनाओं को सामने लाना है।
जियो की सैटेलाइट कनेक्टिविटी योजना इसी दिशा में एक प्रस्तावित पहल के रूप में प्रदर्शित की गई है। जहां मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क की पहुंच सीमित हो जाती है, वहां सैटेलाइट तकनीक संचार सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जियो की प्रस्तावित योजना में करीब 1,600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन के जरिए सैटेलाइट तथा मौजूदा टेरेस्ट्रियल नेटवर्क को एकीकृत करने पर जोर है। इससे दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट और संचार सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं बन सकती हैं।
फिलहाल यह योजना प्रस्तावित चरण में है, लेकिन इसका विजन स्पष्ट है—भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी को उन क्षेत्रों तक पहुंचाना, जहां पारंपरिक नेटवर्क के जरिए सेवाएं देना मुश्किल है। यदि योजना को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो यह ग्रामीण, समुद्री और सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम साबित हो सकती है।
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