दरअसल, NSUI की राष्ट्रीय महासचिव रितु बराला ने आरोप लगाया था कि 13 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में रहते हुए उनके साथ मारपीट और अभद्रता की गई। इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर धरने पर बैठे थे।
कांग्रेस नेताओं की प्रमुख मांग थी कि मामले में जीरो FIR दर्ज की जाए, ताकि शिकायत पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। इस मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं और पुलिस प्रशासन के बीच पिछले तीन दिनों से गतिरोध बना हुआ था।
पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस की मांग पर जीरो FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। पुलिस का तर्क है कि इसी घटना को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले से शिकायत दर्ज है और मामले की जांच की जा रही है।
पुलिस के इस रुख के बाद कांग्रेस नेताओं ने धरना जारी रखा और मामले में लिखित जवाब देने की मांग की।
लगातार बातचीत के बाद कांग्रेस नेताओं और पुलिस प्रशासन के बीच सहमति का रास्ता निकला। सहमति के तहत पुलिस की ओर से FIR दर्ज नहीं करने के आधार लिखित रूप में देने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया गया। कांग्रेस इन लिखित कारणों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी और अदालत का रुख करेगी।
इस तरह तीन दिनों से जारी धरने का समापन हो गया, लेकिन रितु बराला मामले में कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
धरना खत्म होने के बाद अब इस मामले में कांग्रेस की अगली रणनीति और अदालत में दाखिल की जाने वाली याचिका पर सबकी नजरें रहेंगी। कांग्रेस का कहना है कि वह मामले में न्याय की मांग को लेकर कानूनी रास्ता अपनाएगी।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस का धरना समाप्त हो गया है, लेकिन जीरो FIR दर्ज नहीं हुई है। अब आगे की कार्रवाई अदालत में होने वाली सुनवाई और संबंधित पक्षों के रुख पर निर्भर करेगी।
नोट: रितु बराला द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस के पक्ष से संबंधित तथ्यों को आधिकारिक दस्तावेजों तथा संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर अपडेट किया जाना चाहिए।
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