उदयपुर के भटियाणी चौहट्टा स्थित ऐतिहासिक महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली के अवसर पर माता महालक्ष्मी का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर में माता को सोने और चांदी की ज्वेलरी से तैयार की गई विशेष पोशाक पहनाई गई, जिसकी कीमत करीब 8.25 लाख रुपये बताई गई है। इसके साथ ही कमल के फूलों से माता का मनमोहक श्रृंगार किया गया। मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखने को मिला।
जयपुर स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार सुबह विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन किया। पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार, उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा और सांसद मंजू शर्मा सहित पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जयपुर के आमेर में दीपावली पर एक विशेष धार्मिक परंपरा निभाई गई। महालक्ष्मी पूजन से पहले नर हाथी वीरू को भगवान गणेश का स्वरूप मानकर आमंत्रित किया गया। इस दौरान उसके माथे पर तिलक लगाया गया और रोली-मोली बांधकर विधिवत पूजन किया गया।
हाथी वीरू का पूजन राजेंद्र कुमार शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा से पहले भगवान गणेश को आमंत्रित करने की परंपरा है। इसी धार्मिक भावना के साथ हाथी वीरू का पूजन किया गया। मान्यता के अनुसार हाथी को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है और मांगलिक अवसरों पर उसका पूजन शुभ माना जाता है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए अलग-अलग पंचांगों में शुभ समय बताए गए हैं।
सम्राट पंचांग: शाम 5:49 बजे से रात 10:37 बजे तक।
रात्रिकालीन मुहूर्त: रात 12:43 बजे से सुबह 3:31 बजे तक।
सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग: शाम 5:34 बजे से रात 7:58 बजे तक।
रात्रिकालीन मुहूर्त: रात 12:36 बजे से मध्यरात्रि 2:53 बजे तक।
श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित कर रहे हैं।
दीपावली पर पूजा स्थल में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। इसके बाद माता लक्ष्मी, सरस्वती और कुबेर को रोली, अक्षत, पुष्प और मिठाई अर्पित की जाती है। घी का दीपक जलाकर आरती की जाती है।
व्यापारी वर्ग इस अवसर पर अपने बही-खातों, पेन, कंप्यूटर और तिजोरी का पूजन भी करता है। श्रीसूक्त, लक्ष्मी चालीसा और कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है।
दीपावली पर जयपुर के प्रमुख बाजारों और रोशनी वाले क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। शहर में सजावट और खरीदारी के लिए पहुंचने वाले लोगों को यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। प्रमुख बाजारों में वाहन ले जाने से पहले निर्धारित पार्किंग और यातायात संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
दीपावली के इस पावन अवसर पर राजस्थान के अलग-अलग शहरों में धार्मिक आयोजनों, मंदिरों की विशेष सजावट और रोशनी के बीच उत्सव का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान गणेश से सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.