निजी बस ऑपरेटरों, बस मालिकों और ट्रैवल्स एजेंट्स की बैठक में हड़ताल का निर्णय लिया गया। ऑपरेटरों का आरोप है कि फरवरी में पिछली हड़ताल समाप्त कराने के दौरान सरकार और बस संचालकों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी थी, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से इन समझौतों की अपेक्षित पालना नहीं की गई।
बस ऑपरेटरों की प्रमुख मांगों में बसों पर की जा रही कार्रवाई रोकना और सीज की गई बसों को छोड़ना जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि समझौते के बावजूद कार्रवाई जारी रहने से उनके सामने दोबारा हड़ताल पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
हड़ताल का असर केवल बसों के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। निजी बस ऑपरेटरों ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी बंद रखने का फैसला किया है। ऐसे में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों से निजी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है।
प्रदेश में निजी बस सेवाएं लंबी दूरी के साथ-साथ अंतरजिला और अंतरराज्यीय परिवहन का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है और बस अड्डों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।
गौरतलब है कि निजी बस ऑपरेटर इससे पहले फरवरी 2026 में भी हड़ताल कर चुके हैं। उस समय भी परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर बस संचालकों और विभाग के बीच विवाद सामने आया था।
फिलहाल निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल अनिश्चितकालीन है, ऐसे में अब नजर सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर रहेगी।
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