जयपुर, 19 अगस्त। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में व्यवसाय और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए लागू किए गए डी-रेगुलेशन फेज-I के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मुख्य सचिव कार्यालय के तहत गठित डी-रेगुलेशन मॉनिटरिंग सेल की जुलाई 2026 की इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश में 2 लाख 36 हजार 771.68 करोड़ रुपये के निवेश आशय प्राप्त हुए हैं। वहीं राज निवेश पोर्टल पर आवेदनों की संख्या में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के अनुसार राज्य सरकार का उद्देश्य नियामकीय एवं अनुपालन भार को कम करते हुए निवेशकों को आवश्यक स्वीकृतियां और सेवाएं कम समय में उपलब्ध कराना है। इन सुधारों को विकसित राजस्थान@2047 और विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप प्रदेश को अग्रणी निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान राज निवेश पोर्टल पर 40 हजार 692 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 21 हजार 899 आवेदनों को स्वीकृति दी गई। केवल जुलाई में 10 हजार 675 आवेदन प्राप्त हुए। पोर्टल पर ऑनलाइन सेवाओं की संख्या भी 181 से बढ़कर 190 हो गई है।
पोर्टल पर ‘नो योर अप्रूवल्स’, एआई आधारित चैटबॉट, लैंड बैंक की जानकारी, सार्वजनिक डैशबोर्ड और शिकायत निगरानी जैसी सुविधाओं के माध्यम से निवेशकों को आवश्यक जानकारी और सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अप्रैल से जुलाई के दौरान प्राप्त कुल निवेश आशयों में जुलाई माह में 93 हजार 315.46 करोड़ रुपये के निवेश आशय शामिल हैं। जुलाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र 40 हजार 442 करोड़ रुपये के निवेश आशय के साथ सबसे आगे रहा। शिक्षा क्षेत्र में 16 हजार 873 करोड़ और ऊर्जा क्षेत्र में 13 हजार 280 करोड़ रुपये के निवेश आशय प्राप्त हुए। इन तीनों क्षेत्रों की कुल जुलाई निवेश आशयों में करीब 76 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
डी-रेगुलेशन के तहत विभिन्न सेवाओं के निस्तारण में लगने वाले समय में भी उल्लेखनीय कमी आई है। ई-तुलामान सेवाओं का औसत समय 12 दिन से घटकर 7 दिन, जेवीवीएनएल के स्थायी विद्युत कनेक्शन का समय 10 से 5 दिन और एवीवीएनएल का समय 9 से 4 दिन रह गया है। पर्यटन इकाई अनुमोदन का समय भी 16 से घटकर 10 दिन हो गया है। वहीं कारखाना लाइसेंस का स्वतः नवीनीकरण अब वास्तविक समय में किया जा रहा है।
अप्रैल से जुलाई के दौरान राज निवेश पोर्टल पर जयपुर में सर्वाधिक 4,026 स्वीकृतियां जारी की गईं। इसके बाद जोधपुर में 1,560 और अजमेर में 1,071 स्वीकृतियां जारी हुईं। जुलाई में सीकर, टोंक, झुंझुनूं और हनुमानगढ़ में भी स्वीकृतियों में माह-दर-माह उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
नगरीय विकास से जुड़े सुधारों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। उदयपुर, बीकानेर और कोटा विकास प्राधिकरणों के नमूना-आधारित भू-उपयोग परिवर्तन प्रकरणों में औसत निर्णय अवधि 810 दिन से घटकर केवल 65 दिन रह गई है। यानी निर्णय अवधि में करीब 92 प्रतिशत की कमी आई है।
नियम 90-ए के तहत एमएसएमई के भू-उपयोग परिवर्तन की निर्धारित अवधि को 45 दिन से घटाकर 30 कार्य दिवस किया गया है। विलंब की स्थिति में डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान भी लागू किया गया है। पात्र परियोजनाओं में भवन मानचित्र अनुमोदन की प्रक्रिया, जिसमें पहले 60 से 120 दिन लगते थे, अब करीब 10 से 15 दिन में पूरी की जा रही है।
जोखिम आधारित अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के तहत पात्र औद्योगिक एवं चिकित्सा प्रतिष्ठानों के फायर एनओसी के वार्षिक नवीनीकरण की जगह अब वैधता अवधि दो से पांच वर्ष कर दी गई है। कम और मध्यम जोखिम वाली औद्योगिक इकाइयों तथा निर्धारित चिकित्सा प्रतिष्ठानों के लिए तृतीय-पक्ष निरीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
श्रम क्षेत्र में भी प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। निर्धारित सुरक्षा एवं कल्याण उपायों के साथ महिलाओं को दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में रात्रि पाली में काम करने की अनुमति दी गई है। एकमुश्त पंजीकरण, 24 घंटे में ऑनलाइन अनुमोदन और 10 तक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को पंजीकरण से छूट जैसे प्रावधानों से व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम हुआ है।
डी-रेगुलेशन फेज-I के इन सुधारों से राजस्थान में निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं आसान होने के साथ-साथ स्वीकृति और सेवा वितरण की गति बढ़ी है। सरकार का लक्ष्य इन सुधारों को आगे भी जारी रखते हुए प्रदेश में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
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