त्योहारों के दौरान मिठाई और पकवानों की मांग बढ़ने के साथ चीनी की कीमतों पर भी लोगों की नजर है। कुछ बाजारों में चीनी का भाव बढ़कर करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। वहीं सरसों तेल करीब 230 रुपये प्रति किलो और रिफाइंड तेल करीब 190 रुपये प्रति किलो तक बिकने की जानकारी है।
खाने के तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर रसोई के मासिक बजट पर पड़ रहा है। त्योहारों में पकवान और मिठाइयां बनाने वाले परिवारों के लिए तेल और चीनी की बढ़ी कीमत अतिरिक्त खर्च का कारण बन रही है।
महंगाई का असर दाल और अनाज की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। अरहर, मूंग, मसूर और चना दाल के साथ चावल और आटे के दामों में भी बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल इन वस्तुओं की कीमत बढ़ने से सीमित आमदनी वाले परिवारों का राशन बजट प्रभावित हो रहा है।
त्योहारों में मिठाई और पकवानों में इस्तेमाल होने वाले ड्राईफ्रूट भी आम लोगों की जेब पर असर डाल रहे हैं। बाजार में बादाम करीब 1040 रुपये किलो, काजू करीब 950 रुपये किलो और अखरोट व मखाना करीब 1000 रुपये किलो तक पहुंचने की जानकारी है। इसके अलावा किशमिश और छुआरे की कीमतों में भी बढ़ोतरी बताई जा रही है।
बढ़ती कीमतों का असर केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं है। दुकानदारों के मुताबिक थोक बाजार में कीमतें बढ़ने का असर खुदरा बिक्री पर भी पड़ता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लोगों की नजर बनी रहेगी।
महंगाई के बीच कई परिवार त्योहार की खरीदारी में कटौती कर रहे हैं और जरूरत के मुताबिक ही सामान खरीदने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की तुलना करना और तय बजट के अनुसार ही सामान खरीदना बेहतर विकल्प हो सकता है।
कुल मिलाकर, त्योहारों की खुशियों के बीच बढ़ती खाद्य महंगाई ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। चीनी, तेल, दाल और अनाज से लेकर ड्राईफ्रूट तक बढ़े दामों के चलते इस बार त्योहार की रसोई पहले के मुकाबले ज्यादा महंगी पड़ सकती है।
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