शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार स्कूलों में मिड-डे मील के लिए इस्तेमाल होने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता, उसके सुरक्षित भंडारण और रसोईघर की स्वच्छता पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पेयजल की गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने पर उसका इस्तेमाल तत्काल रोकना होगा।
इसके अलावा भोजन तैयार करने वाले रसोइया-सहायकों की व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ बर्तनों के इस्तेमाल की भी नियमित जांच की जाएगी। हर स्कूल में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट लिस्ट को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जा सके।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था का निरीक्षण केवल रिकॉर्ड और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा। अधिकारियों को मौके पर जाकर रसोईघर, खाद्यान्न भंडारण, पेयजल और भोजन की वास्तविक स्थिति की जांच करनी होगी।
जिन स्कूलों में बार-बार खाद्य सुरक्षा से जुड़ी खामियां सामने आएंगी, उन्हें विशेष निगरानी में रखा जाएगा। गंभीर मामलों में शुरुआती सूचना देने में किसी भी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
अगर मिड-डे मील खाने के बाद किसी बच्चे की तबीयत खराब होती है, तो भोजन का वितरण तत्काल रोकना होगा। इसके साथ ही बच्चे को जरूरी मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने और घटना की सूचना संबंधित अधिकारियों को देने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि लापरवाही के कारण किसी तरह की घटना सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
नए दिशा-निर्देशों के बाद स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा को लेकर निगरानी और सख्त होने की उम्मीद है। विभाग का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना और किसी भी संभावित खाद्य सुरक्षा जोखिम को समय रहते रोकना है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.