विभाग के अनुसार, RGHS में दावों की नियमित निगरानी और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कुछ दावे प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाए गए। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अस्पताल में कार्यरत रहीं डॉ. अलका आर्य, बीडीएस ने 20 अप्रैल 2026 को अस्पताल से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जून 2026 से वह किसी अन्य संस्था में चिकित्सा सलाहकार के रूप में कार्यरत थीं।
इसके बावजूद 17 जून, 21 जून और इसके बाद की तारीखों में अस्पताल के रिकॉर्ड में उन्हें उपचार करने वाली चिकित्सक के रूप में दिखाते हुए उपचार विवरण प्रस्तुत किए गए।
जांच में डॉ. अलका आर्य के नाम से कुल 315 उपचार विवरण प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई। इनमें 227 बाहरी रोगी (OPD) और 88 भर्ती रोगी एवं डे-केयर से जुड़े उपचार विवरण शामिल हैं।
इन सभी 315 उपचार विवरणों की कुल दावा राशि 1,42,489 रुपए दर्ज है।
जांच के दौरान 88 भर्ती रोगी और डे-केयर उपचार विवरणों में से 47 मामलों को निरस्त किया जा चुका है। इन दावों की कुल राशि 43,007 रुपए थी।
वहीं बाकी 41 भर्ती रोगी एवं डे-केयर उपचार विवरणों की दावा राशि 56,320 रुपए है। इन मामलों से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की जांच अभी जारी है।
RGHS प्रशासन की ओर से अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था। लेकिन तय समय में अस्पताल की ओर से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया।
इसके बाद एस.बी. मित्तल मेमोरियल हार्ट एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल, सीकर को RGHS से निलंबित करने की कार्रवाई की गई।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
RGHS प्रशासन अब योजना में AI आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण के जरिए संदिग्ध दावों की पहचान कर रहा है। इसके माध्यम से दावों में असामान्य पैटर्न और गड़बड़ियों को चिन्हित किया जा रहा है।
विभाग के अनुसार, चिकित्सक के नाम, मुहर, हस्ताक्षर या डिजिटल पहचान के संभावित गलत इस्तेमाल से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। जांच में यदि अनियमितता या दोष साबित होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि RGHS के लाभार्थियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के साथ योजना की राशि का पारदर्शी और नियमों के अनुसार इस्तेमाल सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। अनियमित दावों के मामलों में विभाग की ओर से जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
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