प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ के अनुसार, विभाग को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर आयुक्तालय मुख्यालय जयपुर, अलवर और दौसा के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने स्ट्रेन हेल्थ केयर, भिवाड़ी के बिना लाइसेंस संचालित गोदाम पर कार्रवाई की।
जांच के दौरान अलग-अलग कंपनियों की कई प्रकार की दवाइयां मिलीं, जिन्हें स्ट्रेन हेल्थ केयर द्वारा बाजार में बेचे जाने की जानकारी सामने आई है।
कार्रवाई के दौरान कंडोर हेल्थकेयर, लालरू (पंजाब), ओपल हेल्थकेयर, करनाल (हरियाणा), एलेक्सा फार्मास्युटिकल्स, बद्दी (हिमाचल प्रदेश) और यूनिशार्प ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, लालरू, एसएएस नगर (मोहाली) सहित विभिन्न कंपनियों की दवाइयां बरामद की गईं।
बरामद दवाइयों में डायक्लोफेनेक सोडियम, एरिक्वा, चका पैन एक्सट्रा, लेडीनेक्स, हाइग्रा 200, पिलप्रोफॉक्सेसिन-500 और ऑक्सीपर प्लस सहित अन्य दवाइयां शामिल हैं।
दवाइयों की गुणवत्ता की जांच के लिए विभाग की टीम ने 9 सैंपल लिए हैं। इनके परीक्षण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गोदाम से दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी बरामद किया गया। इसमें टेपेंटाडॉल, प्रेगबालिन और कोट्रीमोक्साजोल सहित अन्य सामग्री शामिल है। इसके अलावा पैकिंग सामग्री और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी जब्त किए गए।
कार्रवाई के दौरान एक्सपायर्ड सिल्डेनाफिल की गोलियां भी बरामद हुईं।
औषधि नियंत्रण आयुक्त अविचल चतुर्वेदी ने बताया कि बरामद दवाइयों से जुड़ी कंपनियों के संबंध में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के औषधि प्रशासन को सूचना दी गई है। संबंधित कंपनियों की जांच के लिए इन राज्यों में औषधि नियंत्रण अधिकारियों की टीमें भेजी गई हैं।
प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिना लाइसेंस दवाइयों को रखने, बनाने या बेचने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह कार्रवाई औषधि नियंत्रक अजय फाटक के निर्देशन में जयपुर, अलवर, दौसा और भरतपुर के औषधि नियंत्रण अधिकारियों की संयुक्त टीम ने की। विभाग की जांच अभी जारी है और सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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