पूजा के मुताबिक, वह बिहार से भरतपुर पहुंचीं और सबसे पहले गीता कॉलोनी स्थित ससुराल गईं। उनका कहना है कि करीब एक घंटे तक दरवाजा खुलवाने की कोशिश करने के बावजूद किसी ने गेट नहीं खोला। इसके बाद वह विजय नगर स्थित अपनी ननद के घर पहुंचीं, लेकिन वहां भी दरवाजा नहीं खोला गया।
ससुराल में प्रवेश नहीं मिलने के बाद पूजा मदद के लिए मथुरा गेट थाने पहुंचीं। उन्होंने पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। बताया गया कि थाना प्रभारी ने आईपीएस भानुप्रताप सिंह से फोन पर बातचीत भी की।
पुलिस की ओर से मामले को पारिवारिक विवाद बताते हुए तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद पूजा देर रात तक थाने में ही बैठी रहीं।
पूजा ने पुलिस को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि उनके पति उनकी छह साल की बेटी को उनसे दूर करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि भानुप्रताप सिंह पिछले कुछ दिनों से अपनी बेटी के साथ भरतपुर में थे। पत्नी के भरतपुर पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद वह वहां से चले गए।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
पूजा के अनुसार, उनकी मुलाकात भानुप्रताप सिंह से 2015 में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। दोनों के बीच संबंध बने और परिवार की नाराजगी के बावजूद उन्होंने शादी कर ली।
पूजा का दावा है कि शादी के बाद करीब पांच साल तक उन्होंने भरतपुर के एक निजी स्कूल में शिक्षिका के तौर पर काम किया। इसी दौरान भानुप्रताप सिंह ने UPSC की तैयारी की और चयन के बाद पुलिस सेवा में शामिल हुए।
पूजा के मुताबिक, पति के चयन के बाद कुछ समय तक दोनों के बीच सब ठीक रहा, लेकिन बाद में पारिवारिक विवाद बढ़ता गया और अब मामला छह साल की बेटी की कस्टडी/मुलाकात को लेकर भी विवाद तक पहुंच गया है।
आईपीएस भानुप्रताप सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं। उनका परिवार भरतपुर की गीता कॉलोनी में किराये के मकान में रहता है। वहीं, पूजा का मायका राजस्थान के झुंझुनूं जिले की उदयपुरवाटी तहसील के तिवारी का वास गांव में बताया गया है।
फिलहाल यह मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है। पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तथा दोनों पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
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