अमेरिका: के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ते हुए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के गठन का औपचारिक ऐलान किया है। इस मंच का उद्देश्य गाजा युद्ध समेत दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय विवादों और संघर्षों को सुलझाना बताया गया है। ट्रंप ने साफ किया कि भविष्य में यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा।
स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान ट्रंप ने इस मंच का पहला चार्टर पेश किया। उन्होंने कहा—
“हर देश इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहता है। हम शांति के लिए एक नया वैश्विक ढांचा बना रहे हैं।”
ट्रंप के मुताबिक, इस मंच की स्थायी सदस्यता की कीमत 1 अरब डॉलर तय की गई है और कई देश इसमें शामिल होने को उत्सुक हैं।
शुरुआत में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को
इजरायल-फलिस्तीन युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण,
और वहां के प्रशासन की निगरानी
के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर
वैश्विक संघर्ष,
युद्धग्रस्त क्षेत्रों,
और अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान
तक कर दिया गया है।
ट्रंप के ऐलान के मुताबिक, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री शामिल हैं, जिनमें—
अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो
पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान
अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव
शामिल हैं। पाकिस्तान की सदस्यता को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
गाजा युद्ध को लेकर ट्रंप ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा—
“युद्ध अब अपने अंत की ओर है, हालांकि कुछ छोटी आग अभी बाकी है।”
ट्रंप ने हमास को चेतावनी देते हुए कहा कि
उन्हें हथियार डालने होंगे,
वरना उनका अंत तय है।
उन्होंने यह भी मांग की कि
इजरायल के अंतिम बंधक का शव तुरंत लौटाया जाए।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अकेले काम नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में
संयुक्त राष्ट्र,
और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों
के साथ मिलकर इस बोर्ड को प्रभावी बनाया जाएगा।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन के साथ डोनल्ड ट्रंप ने खुद को एक बार फिर वैश्विक शांति के केंद्र में रखने की कोशिश की है। गाजा युद्ध से शुरू हुआ यह मंच अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई शक्ति-संरचना का संकेत दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह बोर्ड वास्तविक शांति लाता है या सिर्फ एक कूटनीतिक प्रयोग बनकर रह जाता है।
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