जयपुर। जैसलमेर से एक पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार किया गया है, जिसने पिछले डेढ़ साल से भारतीय सेना की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान भेजी। आरोपी झबराराम (28), निवासी पोकरण के सांकड़ा, सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के हैंडलर्स से संपर्क में था।
एडीजी (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि झबराराम को 30 जनवरी को जैसलमेर से गिरफ्तार किया गया। शनिवार दोपहर उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 5 दिन के रिमांड पर भेज दिया। इंटेलिजेंस टीम उसकी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह कितने हैंडलर्स से जुड़ा था और कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की।
जांच के दौरान झबराराम के मोबाइल में ISI हैंडलर्स के साथ चैट के सबूत मिले हैं। वह पाकिस्तान एजेंसी के टास्क के अनुसार भारतीय सेना की गुप्त जानकारी भेजता था। टास्क पूरा करने पर उसे 5-10 हजार रुपए का भुगतान उसके बैंक खाते में किया जाता था। उसने अपने नाम से जारी सिमकार्ड का OTP पाक हैंडलर्स को देकर WhatsApp एक्टिवेट करवाया, जिसका उपयोग देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, जासूस सीमावर्ती क्षेत्रों से हर छोटी से छोटी जानकारी पाकिस्तान भेजता था। इसमें शामिल हैं:
भारतीय सेना की मूवमेंट और तैनाती
सेना के ठिकानों और बीओपी की लोकेशन
सीमावर्ती क्षेत्रों में बने ब्रिज, रोड नेटवर्क और निर्माण कार्य
स्कूल, हॉस्टल और अन्य प्रशासनिक इमारतों की फोटो व लोकेशन
इन सभी सूचनाओं का इस्तेमाल दुश्मन देश की योजना और हमले की तैयारी में किया जा सकता है।
इंटेलिजेंस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर पकड़ अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। झबराराम की गिरफ्तारी से सेना और बीएसएफ को बड़े खतरे से बचाया गया। आगे की पूछताछ में और कई खुलासे होने की संभावना है, जिससे यह पता चल सकेगा कि उसने कितने लोगों और कितनी सूचनाओं को साझा किया।
जैसलमेर से पकड़े गए झबराराम मामले ने देश की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चेतावनी दी है। पाक ISI के हैंडलर्स से लगातार संपर्क और सेना की संवेदनशील जानकारी साझा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। अब इंटेलिजेंस टीम की गहन जांच से इस जासूसी नेटवर्क का पूरा खुलासा होने की उम्मीद है।
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