अलवर। औद्योगिक क्षेत्र एमआईए (मात्स्य औद्योगिक क्षेत्र) में लगातार हो रही चोरियों ने उद्योगपतियों की नींद उड़ा दी है। चोरी की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई न होने से उद्योग नगर थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उद्योग क्षेत्र में चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि एक के बाद एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया जा रहा है।
ताजा मामला फूड पार्क स्थित जी-1-177 बृज एग्रो इंडस्ट्रीज का है। फैक्ट्री से सरसों सहित कई कीमती सामान चोरी हो गया। फैक्ट्री संचालक मनीष यादव की शिकायत पर अब जाकर उद्योग नगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
पीड़ित मनीष यादव का आरोप है कि चोरी की घटना के बाद वह लगभग तीन महीने तक थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। बाद में जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप की बात सामने आई, तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई।
पीड़ित का यह भी आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज करते समय थाना प्रभारी ने कहा कि
“रिपोर्ट दर्ज करवाने का क्या फायदा, कुछ नहीं मिलेगा।”
इस कथित बयान के बाद पुलिस की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार फैक्ट्री से
करीब 250 बोरी सरसों
डबल और सिंगल पंखे
सीसीटीवी कैमरे
100 किलो का इलेक्ट्रॉनिक कांटा
पांच कुर्सियां
इन्वर्टर और बैट्री
चोरी हुए हैं। चोरी गए सामान की अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई जा रही है।
पीड़ित के मुताबिक चोरों ने पहले मुख्य गेट का ताला तोड़ा, फिर शेड और ऑफिस के ताले तोड़कर सारा सामान ले गए। घटना के समय फैक्ट्री में धर्मेन्द्र सैन नाम का चौकीदार तैनात था।
मनीष यादव ने दूसरी बार हुई चोरी को लेकर चौकीदार की भूमिका पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि फैक्ट्री बंद रहने के दौरान सारा सामान सुरक्षित था, लेकिन बाद में चोरी हो गई, जिससे मिलीभगत की आशंका गहराती है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जुलाई माह में भी फैक्ट्री में चोरी हुई थी, जिसमें मोटर, केबल और अन्य उपकरण चोरी हो गए थे। उस समय मामला दर्ज नहीं कराया गया, जिससे चोरों के हौसले और बढ़ गए।
लगातार हो रही चोरियों से एमआईए क्षेत्र के फैक्ट्री प्रबंधकों और उद्योगपतियों में भारी आक्रोश है। उद्योग संगठनों ने मांग की है कि
औद्योगिक क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाई जाए
चोरी की घटनाओं का तुरंत खुलासा किया जाए
आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए
एमआईए क्षेत्र में बढ़ती चोरियों और रिपोर्ट दर्ज करने में देरी ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो औद्योगिक क्षेत्र में निवेश और सुरक्षा दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उद्योगपतियों की निगाहें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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