मोहन भागवत लखनऊ बयान: के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने स्पष्ट कहा कि संघ भाजपा का रिमोट कंट्रोल नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक भाजपा में जाते हैं और आगे बढ़ते हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ भाजपा को चलाता है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा का विरोध करने वाले ही अक्सर संघ का भी विरोध करते हैं।
अमेरिकी टैरिफ के सवाल पर भागवत ने कहा कि यह अमेरिका का पुराना तरीका है। वे हथियार और आर्थिक ताकत के दम पर अन्य देशों को झुकाना चाहते हैं।
भागवत ने कहा, “भारत इतना मजबूत है कि वह झुका नहीं है। हमारी जनता तैयार है, इसलिए इसका भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।”
भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचते ही NSUI, समाजवादी छात्र सभा और भीम आर्मी से जुड़े छात्रों ने ‘गो बैक मोहन भागवत’ के नारे लगाए।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक हुई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। इसके बाद कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
संघ प्रमुख ने Indira Gandhi Pratishthan में आयोजित कार्यक्रम में भी विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विचार रखे।
भागवत ने कहा कि मंदिरों की देखभाल और नियमित पूजा-पाठ की जिम्मेदारी समाज को लेनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सिख समाज अपने गुरुद्वारों का संचालन बेहतर तरीके से करता है। धर्माचार्यों और समाज को इस विषय पर मंथन करना चाहिए।
UGC मामला कोर्ट में: UGC से जुड़ा विषय सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, कोर्ट के निर्णय के अनुसार आगे की प्रक्रिया होगी।
छुआछूत खत्म होनी चाहिए: हम सब भारत माता की संतान हैं, जाति या रंग के आधार पर भेदभाव समाप्त होना चाहिए।
जाति व्यवस्था पुरानी: पहले काम के आधार पर व्यवस्था थी, अब समय बदल गया है।
हिंदू समाज बंटा हुआ: समाज में ताकत है, लेकिन एकजुटता की कमी है।
आधुनिकीकरण जरूरी: आधुनिक बनें, लेकिन पश्चिमीकरण की अंधी नकल न करें।
परिवार और संस्कार: संयुक्त परिवार कम हो रहे हैं, लेकिन पारिवारिक संवाद बना रहना चाहिए।
सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग: तकनीक के मालिक बनें, गुलाम नहीं।
समाज जागरूक होगा तो राजनीति सुधरेगी: राजनीति समाज से बनती है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के मालवीय सभागार में शोधार्थियों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकताएं हैं, इन्हें व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी शिक्षा प्रणाली ने भारत की पारंपरिक व्यवस्था को प्रभावित किया। शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे भारत को समझने के लिए प्रामाणिक शोध करें।
विपक्षी छात्र संगठनों ने कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई। NSUI कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में संघ से जुड़े कार्यक्रमों को अनुमति दी जाती है, जबकि अन्य संगठनों को स्थान नहीं मिलता।
लखनऊ दौरे के दौरान मोहन भागवत के बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। RSS और भाजपा के संबंध, अमेरिकी टैरिफ, जाति व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन जैसे मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राय सामने आई।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय में हुए विरोध प्रदर्शन ने इस दौरे को और सुर्खियों में ला दिया। आने वाले दिनों में इन बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं।
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