राजस्थान: के दौसा जिला मुख्यालय से आरक्षण और अन्य मांगों को लेकर निकली जन अधिकार यात्रा ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। सैनी, माली, कुशवाह, शाक्य, मौर्य और सुमन समाज की संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले निकली यह यात्रा रविवार रात दौसा शहर में ठहरने के बाद सोमवार सुबह जयपुर के लिए रवाना हो गई। संघर्ष समिति ने 25 फरवरी को विधानसभा घेराव की चेतावनी देते हुए सरकार पर समाज की मांगों को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
जन अधिकार यात्रा रविवार रात गणेशपुरा रोड स्थित सैनी छात्रावास में रुकी थी। सोमवार सुबह प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सैनी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग हाथों में तिरंगा झंडा लेकर जयपुर की ओर रवाना हुए। यात्रा के दौरान नारेबाजी और जोश देखने को मिला। समाज के युवाओं और बुजुर्गों ने एक स्वर में अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की।
दौसा शहर से गुजरते समय यात्रा का दृश्य उल्लेखनीय रहा। सड़कों पर समाज के लोगों की भीड़ और तिरंगों की कतारों ने वातावरण को आंदोलनमय बना दिया। इससे पहले कैलाई और भाण्डारेज में समाज के लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और समर्थन जताया।
संघर्ष समिति के अनुसार यह जन अधिकार यात्रा भरतपुर जिले के हलैना क्षेत्र के गंधार गांव से शुरू हुई थी। वहां से शुरू होकर यात्रा विभिन्न जिलों से होती हुई दौसा पहुंची और अब जयपुर की ओर अग्रसर है। समिति का कहना है कि 25 फरवरी को जयपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव किया जाएगा, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सैनी ने आरोप लगाया कि समाज के प्रतिनिधिमंडल ने कई बार सरकार से वार्ता के लिए समय मांगा, लेकिन उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पिछले आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने का आश्वासन भी अधूरा रह गया।
संघर्ष समिति ने 11 सूत्रीय मांगों का एजेंडा तैयार किया है, जिसमें प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
सैनी, माली, कुशवाह, शाक्य, मौर्य और सुमन समाज को 12 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
महात्मा ज्योतिराव फुले बोर्ड को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
सेना में सैनी रेजिमेंट का गठन किया जाए।
बागवानी विकास बोर्ड का गठन किया जाए।
समाज के युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा में विशेष योजनाएं लागू की जाएं।
इनके अलावा सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान से जुड़ी अन्य मांगें भी शामिल हैं।
समिति का कहना है कि इन मांगों का उद्देश्य समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना है।
संघर्ष समिति के नेताओं ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि समाज की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि कई बार ज्ञापन सौंपने और वार्ता का अनुरोध करने के बावजूद सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिला।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने पिछले आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ। इससे समाज में असंतोष बढ़ रहा है।
जन अधिकार यात्रा केवल मांगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज में एकजुटता का संदेश भी दे रही है। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी शामिल हुए। हाथों में तिरंगा झंडा और बैनर लेकर लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं।
यात्रा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए है। उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत अपनी मांगों को रखने की बात कही।
संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो 25 फरवरी को जयपुर में विधानसभा का घेराव किया जाएगा। समिति का दावा है कि उस दिन बड़ी संख्या में समाज के लोग जयपुर पहुंचेंगे।
जयपुर में संभावित घेराव को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। हालांकि समिति ने भरोसा दिलाया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।
जन अधिकार यात्रा को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार पर समाज की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांगों पर जल्द बातचीत शुरू नहीं हुई तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
यह आंदोलन केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है। इसमें शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि समाज के युवाओं को समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे निराशा बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि सकारात्मक संवाद की पहल करती है तो समाधान संभव है, अन्यथा आंदोलन का विस्तार होगा।
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