यह एडवाइजरी 5 जनवरी को जारी की गई चेतावनी की अगली कड़ी है और ईरान की लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए जारी की गई है।
भारत सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी विरोध प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें और ईरान स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में लगातार बने रहें। साथ ही स्थानीय मीडिया और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
अंग्रेजी अखबार द गार्डियन के मुताबिक, बुधवार को तेहरान यूनिवर्सिटी कैंपस में कड़ी सुरक्षा के बीच 300 शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इनमें प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ सुरक्षाबलों के शव भी शामिल हैं।
अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अब तक ईरान में
2,403 प्रदर्शनकारी
147 सरकारी समर्थक
कुल मिलाकर 2,550 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, ईरान इंटरनेशनल वेबसाइट ने दावा किया है कि देशभर में 12,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई।
ईरान में 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को आज फांसी दी जा सकती है। उन्हें 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और मात्र तीन दिन बाद 11 जनवरी को मौत की सजा सुना दी गई।
सुलतानी पर ‘मोहारेबेह’ (ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने) का आरोप लगाया गया है, जो ईरान के कानून में सबसे गंभीर अपराधों में से एक है।
न कोई खुला ट्रायल
न वकील
न अपील का मौका
परिवार को सिर्फ 10 मिनट की आखिरी मुलाकात की अनुमति दी गई है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह डर फैलाने के लिए की जा रही फास्ट-ट्रैक फांसी है, ताकि हजारों गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को चुप कराया जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। इसके जवाब में ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी ने ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर लोगों की हत्या का आरोप लगाया।
हालांकि, अरब देशों और इजराइल ने अमेरिका से फिलहाल सैन्य कार्रवाई न करने की अपील की है। उनका मानना है कि सैन्य हमला हालात को और बिगाड़ सकता है।
ट्रम्प ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले से भारत, चीन और यूएई जैसे देशों पर असर पड़ सकता है।
इस बीच ईरान की मुद्रा रियाल लगभग शून्य मूल्य पर पहुंच चुकी है, जिससे आम जनता की आर्थिक स्थिति और बदतर हो गई है।
ईरान में पढ़ाई कर रहे करीब 2,000 कश्मीरी छात्रों और वहां काम कर रहे 1,500 से ज्यादा भारतीयों के परिवारों की चिंता बढ़ गई है। कई परिवारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से अपने बच्चों से संपर्क टूट गया है।
ईरान इस समय राजनीतिक, सामाजिक और मानवीय संकट के सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। बढ़ती मौतें, फांसी की सजा, अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक तबाही ने हालात को और भयावह बना दिया है। भारत सरकार की एडवाइजरी इस बात का संकेत है कि स्थिति अत्यंत संवेदनशील है। आने वाले दिनों में ईरान संकट वैश्विक राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
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