राजस्थान: में पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने और नए वाहनों की खरीद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई स्क्रैप पॉलिसी पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। राज्य सरकार की कैबिनेट ने नई स्क्रैप पॉलिसी के तहत पुराने वाहन स्क्रैप कराने पर नए वाहन के रजिस्ट्रेशन में मिलने वाली छूट को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की मंजूरी दी थी, लेकिन परिवहन विभाग ने इस फैसले को पूरी तरह लागू नहीं किया।
परिवहन विभाग की ओर से जारी प्रावधानों के अनुसार, वन टाइम रोड टैक्स में फिलहाल 25 प्रतिशत की ही छूट दी जा रही है। इसके साथ ही विभाग ने छूट की अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये तय कर दी है। इससे न तो लग्जरी वाहन खरीदने वालों को अपेक्षित लाभ मिल रहा है और न ही छोटी कार लेने वाले उपभोक्ताओं को कोई खास फायदा हो पा रहा है।
नई स्क्रैप पॉलिसी से उम्मीद थी कि पुराने वाहन मालिक बड़ी छूट के चलते नए वाहन खरीदने के लिए आगे आएंगे, लेकिन 50 प्रतिशत छूट लागू न होने और अधिकतम 1 लाख रुपये की सीमा तय होने से उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि इस स्थिति में पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने की रफ्तार धीमी रह सकती है।
अतिरिक्त परिवहन आयुक्त ओम प्रकाश बुनकार ने कहा कि नई स्क्रैप पॉलिसी लागू हो चुकी है, लेकिन फिलहाल वन टाइम रोड टैक्स पर 25 प्रतिशत की ही छूट दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पॉलिसी में छूट को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रावधान है, लेकिन अभी इस पर विचार-विमर्श चल रहा है। साथ ही रोड टैक्स पर अधिकतम छूट 1 लाख रुपये तय की गई है।
फोर्टी अध्यक्ष और स्क्रैप सेंटर संचालक सुरेश अग्रवाल के अनुसार, नई पॉलिसी के बाद पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने को लेकर लोगों की पूछताछ बढ़ी है। उनका कहना है कि पॉलिसी अधिसूचित होने के बाद आने वाले समय में स्क्रैपिंग की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि छूट को लेकर असमंजस का असर भी देखने को मिल सकता है।
स्क्रैप पॉलिसी का उद्देश्य पुराने वाहनों को हटाकर प्रदूषण कम करना और नए वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देना है, लेकिन कैबिनेट से मंजूर 50 प्रतिशत छूट को लागू न किए जाने से नीति की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। यदि परिवहन विभाग छूट को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से लागू नहीं करता, तो पुराने वाहन सड़कों से हटाने का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
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