सीकर। राजस्थान की राजनीति में चल रहे दल-बदल और सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में वापसी को लेकर तीखा बयान दिया है। रविवार को सीकर के श्रीमाधोपुर दौरे पर पहुंचे मंत्री खर्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “जैसे वे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे, वैसे ही अब बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में जा रहे हैं।”
मंत्री खर्रा ने कहा कि जब महेंद्रजीत सिंह मालवीय कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में आए थे, तब उन्होंने यह कहकर कांग्रेस पर आरोप लगाए थे कि वहां उनका दम घुट रहा है और उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा। भाजपा में आने के बाद पार्टी ने उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया और बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार भी बनाया।
यूडीएच मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकसभा चुनाव में हार का फैसला जनता का था। “जनता और मतदाताओं की मर्जी है कि वे किसे स्वीकार करें। यदि जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं किया, तो इसका दोष भारतीय जनता पार्टी पर डालना बिल्कुल अनुचित है।”
उन्होंने कहा कि अब अगर वे भाजपा को जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत सोच है।
तीन दिवसीय विशेष योग्यजन शिविर के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है। ऐसे शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों को सीधे लाभ मिल रहा है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
कार्यक्रम के दौरान योग्यजनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र सहित कई सहायक उपकरण वितरित किए गए।
एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर मंत्री खर्रा ने कहा कि देश में यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर के तहत मृत मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक जगह दर्ज हैं, उन्हें भी सूची से हटाया जा रहा है।
मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को इस प्रक्रिया से इसलिए परेशानी हो रही है क्योंकि उनके कुछ मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे, जिससे उन्हें राजनीतिक लाभ मिल रहा था। “अगर इस प्रक्रिया से किसी के पेट में दर्द हो रहा है, तो उसका इलाज हमारे पास नहीं है,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा।
महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में वापसी को लेकर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बयान राजस्थान की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। जहां भाजपा इसे जनता का फैसला बता रही है, वहीं कांग्रेस और भाजपा के बीच एसआईआर को लेकर सियासी टकराव और तेज होता दिख रहा है।
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