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ध्वनिमत से पारित अरबों की अनुदान मांगें! क्या बदल जाएगा राजस्थान के शहरों का भविष्य?

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को नगरीय विकास एवं आवासन विभाग (मांग संख्या-39) तथा स्वायत्त शासन विभाग (मांग संख्या-40) की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गईं। सदन ने नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के लिए 3 अरब 34 लाख 99 हजार रुपये तथा स्वायत्त शासन विभाग के लिए 147 अरब 88 करोड़ 48 लाख 58 हजार रुपये की अनुदान राशि को स्वीकृति प्रदान की।

चर्चा का जवाब देते हुए स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार सुनियोजित, पारदर्शी और जनहितकारी विकास के मॉडल पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णय, उनका समयबद्ध क्रियान्वयन और धरातल पर दिखते परिणाम राज्य के शहरी विकास को नई दिशा दे रहे हैं।


दो वर्षों में शहरी विकास को नई रफ्तार

मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल में नगरीय विकास एवं आवासन तथा स्वायत्त शासन विभाग ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए हैं।

भूमि आवंटन में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवीन भूमि आवंटन नीति-2025 लागू की गई है। इस नीति का उद्देश्य आवंटित भूमि के दुरुपयोग पर रोक लगाना तथा सामाजिक संगठनों को रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराना है।

इसी क्रम में नई टाउनशिप नीति-2024 लागू की गई है, जिससे शहरी क्षेत्रों का सुनियोजित विस्तार सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का दावा है कि इन नीतियों के माध्यम से अव्यवस्थित शहरीकरण पर नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।


विकास प्राधिकरणों और नगर विकास न्यास का गठन

बेहतर शहरी नियोजन की दृष्टि से भरतपुर और बीकानेर में विकास प्राधिकरणों का गठन किया गया है, जबकि बालोतरा और दौसा-बान्दीकुई में नगर विकास न्यास स्थापित किए गए हैं।

सरकार के अनुसार प्रदेश में अब तक नगरीय विकास के 3 हजार 153 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। यह राशि विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं, सड़क, सीवरेज, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं पर व्यय की गई है।


जयपुर विकास प्राधिकरण में भर्ती प्रक्रिया

मंत्री ने बताया कि जयपुर विकास प्राधिकरण में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी जा चुकी है।

जयपुर में यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए आरआईटीईएस से सर्वे कराया गया है। सर्वे के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिसके लिए विभिन्न हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि महल रोड को 12 करोड़ रुपये की लागत से सिग्नल फ्री बनाया जा रहा है, जिससे यातायात जाम में कमी आएगी।


मास्टर प्लान और जीआईएस आधारित विकास

मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्षों में केवल आठ शहरों के मास्टर प्लान अनुमोदित किए गए थे, जबकि वर्तमान सरकार ने दो वर्षों में छह शहरों के मास्टर प्लान लागू कर दिए हैं और सात शहरों के मास्टर प्लान पर आमजन से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

नवगठित 115 शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राजस्थान नगर सुधार अधिनियम, 1959 की धारा 3(1) के तहत 19 शहरों की अधिसूचना जारी की जा चुकी है।

सरकार ने पहली बार श्रेणी 3, 4 और 5 नगरों के लिए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार करने हेतु 11.15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। सभी मास्टर प्लान अमृत गाइडलाइन के अनुरूप जीआईएस आधारित तैयार किए जा रहे हैं, जिससे शहरी विकास वैज्ञानिक और डेटा आधारित हो सके।


ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट और मेट्रो विस्तार

सरकार ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट पॉलिसी-2025 अधिसूचित की है। इसके तहत सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए ट्रांजिट स्टेशनों के आसपास उच्च घनत्व विकास का प्रावधान किया गया है।

जयपुर में पांच टीओडी कॉरिडोर चिन्हित कर घोषित किए गए हैं।

जयपुर मेट्रो फेज-2 के लिए विस्तृत ट्रैफिक एवं ट्रांसपोर्ट अध्ययन कराया गया है। प्रह्लादपुरा से तोड़ी मोड़ तक प्रस्तावित कॉरिडोर औद्योगिक, शैक्षणिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को जोड़ेगा। सरकार का दावा है कि इससे जयपुर को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।

जगतपुरा और वैशाली नगर क्षेत्रों में भी मेट्रो विस्तार पर विचार किया जा रहा है।


राइजिंग राजस्थान और एमओयू

राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम के तहत नगरीय विकास विभाग में 771 एमओयू किए गए हैं। इनमें से 405 एमओयू, जिनकी कुल राशि 37 हजार 573 करोड़ रुपये है, पर ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और कार्य शुरू हो चुके हैं।

राजस्थान आवासन मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 380 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों पर व्यय किए हैं। जयपुर के प्रताप नगर में 336 आवासों और 132 शोरूम के निर्माण के लिए मार्च 2026 में निविदा आमंत्रित की जाएगी।


मास्टर विकास योजना-2047

जेडीए में 679 नए राजस्व ग्रामों को जोड़कर मास्टर विकास योजना-2047 तैयार की जा रही है। वर्तमान मास्टर विकास योजना-2025 की अवधि 2027 तक निर्धारित की गई है।

सरकार का लक्ष्य दीर्घकालिक और संरचित शहरी विकास मॉडल लागू करना है।


डिजिटल और पारदर्शी शासन

मंत्री ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जेडीए सहित विभिन्न विकास प्राधिकरणों और आवासन मंडल की सेवाओं को अधिकतम ऑनलाइन किया गया है।

सभी 49 नागरिक सेवाएं 100 प्रतिशत ऑनलाइन कर दी गई हैं। पट्टा आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है और 100 प्रतिशत ई-पट्टा जारी किए जा रहे हैं। अब तक लगभग 24 हजार ई-पट्टे जारी किए जा चुके हैं।


आवासन और प्रधानमंत्री आवास योजना

राजस्थान आवासन मंडल ने दो वर्षों में 4,215 आवास आवंटित किए हैं और 6 हजार से अधिक आवासों का कब्जा सुपुर्द किया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत दो वर्षों में 79,027 आवास स्वीकृत किए गए, जबकि पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्षों में 77,950 आवास स्वीकृत हुए थे।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1 में 2 लाख 36 हजार आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। योजना 2.0 के तहत 48,619 आवासों को भारत सरकार से स्वीकृति मिली और 211 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान प्राप्त हुआ।

घुमंतु, अर्द्धघुमंतु, गाड़िया लुहार और कालबेलिया समुदाय के लोगों को 1,348 पट्टे/आवंटन पत्र जारी किए गए।


नगरीय निकायों का विस्तार और परिसीमन

वर्ष 2024 में 27 नए नगरीय निकायों का गठन और 10 निकायों का क्रमोन्नयन किया गया। वर्ष 2025 में 25 नए नगरीय निकायों का सृजन तथा 5 का क्रमोन्नयन किया गया।

राज्य की 309 शहरी निकायों का परिसीमन और वार्डों का पुनर्गठन किया गया, जिसके बाद कुल 10,245 वार्ड सृजित हुए। भीलवाड़ा और पाली में नगर निगम स्थापित किए गए।


निष्कर्ष:

राजस्थान विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवासन तथा स्वायत्त शासन विभाग की अनुदान मांगों का ध्वनिमत से पारित होना राज्य के शहरी विकास एजेंडे के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकार का दावा है कि मास्टर प्लान, जीआईएस आधारित विकास, मेट्रो विस्तार, डिजिटल सेवाएं और आवासन योजनाएं मिलकर प्रदेश के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और नागरिक-केंद्रित बनाएंगी।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वीकृत बजट का क्रियान्वयन किस गति और पारदर्शिता के साथ होता है और इसका लाभ आम नागरिकों तक कितनी प्रभावशीलता से पहुंचता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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