ईरान: के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की कथित हत्या के बाद पाकिस्तान में गुस्से की लहर तेज हो गई है। रविवार को Karachi में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। माई कोलाची रोड स्थित United States Consulate General Karachi के पास हजारों प्रदर्शनकारी जमा हो गए और देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई लोग घायल हुए, जिन्हें एंबुलेंस के जरिए Civil Hospital Karachi में भर्ती कराया गया।
शनिवार को तेहरान में हुए संयुक्त अमेरिकी-इजराइली हवाई हमलों में खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी। इसी के बाद पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कराची में रविवार सुबह बड़ी संख्या में लोग अमेरिकी दूतावास के बाहर जमा हो गए।
शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन कुछ देर बाद भीड़ उग्र हो गई। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन हालात बिगड़ते देख बल प्रयोग करना पड़ा।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, झड़प के दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया।
सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लांजर ने घटना का संज्ञान लेते हुए कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक आजाद खान से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
Ayatollah Ruhollah Khomeini के 1989 में निधन के बाद खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता बने थे। तीन दशक से अधिक समय तक उन्होंने ईरान की राजनीति, विदेश नीति और सैन्य रणनीति का नेतृत्व किया।
उनकी मौत की खबर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम जगत में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। पाकिस्तान, जो ऐतिहासिक रूप से ईरान के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध रखता है, वहां भावनात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
घटना के बाद कराची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और रेंजर्स तैनात किए गए हैं। माई कोलाची रोड और आसपास के क्षेत्रों में यातायात अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ भी चेतावनी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पाकिस्तान के कुछ धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने खामेनेई की मौत की कड़ी निंदा की है। कई संगठनों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि स्थिति नियंत्रित नहीं की गई तो यह विरोध अन्य शहरों—लाहौर, इस्लामाबाद और पेशावर—तक भी फैल सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर दक्षिण एशिया पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो पाकिस्तान समेत कई देशों को कूटनीतिक संतुलन साधना होगा।
पाकिस्तान सरकार फिलहाल आधिकारिक बयान देने से बच रही है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस्लामाबाद स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
कराची के स्थानीय निवासियों में भय और अनिश्चितता का माहौल है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर चिंता जताई कि यदि हिंसा बढ़ती है तो शहर की सामान्य जिंदगी प्रभावित हो सकती है।
व्यापारिक संगठनों ने अपील की है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहें, ताकि आर्थिक गतिविधियों पर असर न पड़े।
खामेनेई की कथित हत्या के बाद कराची में भड़की हिंसा यह दर्शाती है कि मिडिल ईस्ट की घटनाओं का प्रभाव सीमाओं से परे जाता है। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हुई झड़प ने पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हालात को शांत करना और किसी बड़े टकराव को रोकना है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या विरोध प्रदर्शन शांत होते हैं या क्षेत्रीय तनाव और गहराता है।
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