जयपुर। साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को पड़ने जा रहा है, लेकिन जयपुरवासियों के लिए यह खगोलीय घटना केवल 20 मिनट तक ही दिखाई देगी। खगोल गणना के अनुसार ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। हालांकि जयपुर में चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा, जिससे यहां ग्रहण का केवल अंतिम चरण ही दिखाई देगा।
यह चंद्रग्रहण श्री सत्यनारायण पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। शहर के प्रमुख मंदिरों में इस दिन विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
ग्रहण का अधिकांश समय दिन में रहेगा, जबकि चंद्रमा जयपुर में शाम 6:22 बजे क्षितिज पर उदित होगा। इसके 25 मिनट बाद यानी 6:47 बजे ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इस कारण शहर में केवल अंतिम 20-25 मिनट का दृश्य ही देखने को मिलेगा। देश के अन्य हिस्सों में ‘ब्लड मून’ का नजारा भी दिखाई दे सकता है, लेकिन जयपुर में पूरा चरण नजर नहीं आएगा।
गोविंददेव जी मंदिर के सेवाधिकारी मानस गोस्वामी के अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इस हिसाब से 3 मार्च की सुबह लगभग 6:55 बजे से सूतक प्रारंभ हो जाएगा।
सूतक लगते ही अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, भोजन बनाना और ग्रहण करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल में विशेष सावधानी बरती जाती है।
जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में इस बार व्यवस्था कुछ अलग रहेगी। ग्रहणकाल के दौरान भी यहां विशेष दर्शन जारी रहेंगे, ताकि श्रद्धालु निर्धारित समय में दर्शन कर सकें। हालांकि ग्वाल, संध्या और शयन दर्शन नहीं होंगे।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय के अनुसार ही दर्शन करें और भीड़ से बचने के लिए अनुशासन बनाए रखें।
चूंकि यह चंद्रग्रहण होली के समय पड़ रहा है, इसलिए धार्मिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए 3 मार्च को रंग-गुलाल की होली नहीं खेली जाएगी। सूतक और ग्रहण के साये में रंग खेलना शुभ नहीं माना जाता।
ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम को शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके बाद अगले दिन 4 मार्च को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी और इसी दिन धुलंडी व रंगों की होली मनाई जाएगी।
चंद्रग्रहण के कारण शहर के कई मंदिरों में दर्शन व्यवस्था में बदलाव रहेगा। अधिकांश मंदिरों में सूतक लगते ही कपाट बंद कर दिए जाएंगे और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण कर पुनः खोले जाएंगे।
हालांकि गोविंद देव जी मंदिर में विशेष व्यवस्था के तहत ग्रहणकाल में भी सीमित समय के लिए दर्शन खुले रहेंगे, जो श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात है।
चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व है।
पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला यह ग्रहण धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और मंत्र जाप के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
3 मार्च को पड़ने वाला साल का पहला चंद्रग्रहण जयपुर में केवल 20 मिनट के लिए दिखाई देगा, लेकिन इसका धार्मिक प्रभाव पूरे दिन महसूस किया जाएगा। सूतक सुबह से ही लग जाएगा और होली का रंगोत्सव एक दिन आगे बढ़ जाएगा। ऐसे में श्रद्धालुओं और शहरवासियों के लिए यह दिन आस्था और सावधानी दोनों का संदेश लेकर आ रहा है।
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