मध्य-पूर्व: में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच देश के कई हिस्सों में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। इस स्थिति को देखते हुए राजस्थान सरकार ने गैस सप्लाई व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है।
राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव Ambareesh Kumar ने सभी जिलों के रसद अधिकारियों (डीएसओ) को गैस सिलेंडरों की सप्लाई की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश बुधवार को Jaipur स्थित सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दिए गए।
बैठक में जिलों के डीएसओ को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ा गया, ताकि प्रदेश के विभिन्न जिलों में गैस सप्लाई की वास्तविक स्थिति का फीडबैक लिया जा सके।
शासन सचिव अंबरीष कुमार ने अधिकारियों से कहा कि जिलों में घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई सुचारु रूप से जारी रहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी उपभोक्ता को गैस सिलेंडर की कमी के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र से गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर शिकायत मिलती है तो संबंधित गैस एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा जिलों के डीएसओ को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में गैस सप्लाई की स्थिति की नियमित रिपोर्ट विभाग को भेजें, ताकि राज्य स्तर पर स्थिति की समीक्षा की जा सके।
बैठक में तेल कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। शासन सचिव ने उन्हें निर्देश दिए कि वे जिलों के डीएसओ के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें।
उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर तय की जाए। खासतौर पर उन संस्थानों को प्राथमिकता दी जाए जो आवश्यक सेवाओं से जुड़े हैं।
इनमें शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े संस्थान शामिल हैं।
अधिकारियों ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं तक गैस सिलेंडर की आपूर्ति बिना किसी बाधा के पहुंचनी चाहिए।
यदि किसी उपभोक्ता को गैस सिलेंडर की डिलीवरी में देरी या किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे प्राथमिकता वाले सेक्टरों में गैस सप्लाई की विशेष मॉनिटरिंग करें, ताकि अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं में गैस की कमी न हो।
सूत्रों के अनुसार बैठक में गैस सिलेंडर के स्टॉक और वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने पर भी चर्चा हुई।
प्रस्ताव दिया गया कि तेल कंपनियां यह जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराएं कि किस गैस एजेंसी को रोज कितने सिलेंडर दिए जा रहे हैं और उन सिलेंडरों का वितरण किन उपभोक्ताओं को किया जा रहा है।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो डीएसओ या उनके प्रतिनिधि अधिकारी गैस एजेंसियों के रिकॉर्ड की जांच कर सकेंगे। इससे बाजार में कालाबाजारी और अनियमित वितरण को रोकने में मदद मिलेगी।
हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
गैस सिलेंडरों की कमी के समय अक्सर कालाबाजारी की शिकायतें सामने आती हैं। इसको देखते हुए सरकार इस बार पहले से ही सतर्क नजर आ रही है।
अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी एजेंसी द्वारा गैस सिलेंडरों की जमाखोरी या अवैध बिक्री की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा जिलों के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार में गैस सिलेंडरों की कीमतों और उपलब्धता पर नजर रखें।
प्रदेश में बढ़ते गैस संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma भी स्थिति की समीक्षा करने वाले हैं।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री बुधवार शाम को एक महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं, जिसमें प्रदेश में गैस सप्लाई की स्थिति का फीडबैक लिया जाएगा।
इसी बैठक की तैयारियों के तहत खाद्य विभाग के शासन सचिव ने यह समीक्षा बैठक आयोजित की, ताकि जिलों से वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाई जा सके।
सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में गैस सिलेंडरों की सप्लाई सामान्य बनी रहे और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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