गोंडा। यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) से जुड़े नए प्रस्तावित बिल को लेकर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। सवर्ण आर्मी के बैनर तले हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बुधवार को गोंडा शहर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अंबेडकर चौराहे से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला और सरकार से यूजीसी बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी के साथ-साथ धार्मिक प्रतीकों का भी उपयोग किया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया और इसे अपने विरोध का प्रतीकात्मक माध्यम बताया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था।
प्रदर्शनकारी पहले सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपने से असंतुष्ट नजर आए और सीधे जिलाधिकारी से मिलने की मांग पर अड़ गए। स्थिति को संभालते हुए अंततः जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने स्वयं सवर्ण आर्मी के प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन स्वीकार किया। प्रशासन की ओर से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कराने पर जोर दिया गया।
सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश पांडेय ने मीडिया से बातचीत में यूजीसी बिल को लेकर अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिल में ऐसे प्रावधान हैं, जो सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को एकतरफा रूप से दोषी ठहराने की मानसिकता को दर्शाते हैं।
पांडेय ने कहा,
“इस बिल में यह मान लिया गया है कि यदि अनुसूचित जाति या पिछड़ा वर्ग के छात्र के साथ कोई भेदभाव होता है, तो उसका जिम्मेदार सामान्य जाति का व्यक्ति ही होगा। यह सामान्य वर्ग को अपराधी की तरह पेश करने की कोशिश है, जिसे हम किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया, तो राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान सर्वेश पांडेय ने हालिया शंकराचार्य विवाद पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि
“पहले धर्म दंड होता था, आज राजतंत्र धर्म दंड पर हावी होता दिख रहा है। शंकराचार्य हिंदू धर्म के मार्गदर्शक हैं, उनके साथ जो हुआ वह गलत है।”
इस विरोध प्रदर्शन में युवाओं और छात्राओं की भागीदारी भी देखने को मिली। परी नाम की एक युवती ने कहा कि यूजीसी बिल कैंपस के भीतर भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है।
उन्होंने कहा,
“जिस तरह से सत्ता में बैठना आता है, उसी तरह सत्ता से हटाना भी आता है। यह बिल कैंपस में विभाजन पैदा करेगा, इसलिए इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।”
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी और महिला पुलिस की तैनाती की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।
UGC बिल विरोध गोंडा में सवर्ण आर्मी का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि शिक्षा से जुड़े इस प्रस्तावित कानून को लेकर समाज के एक बड़े वर्ग में असंतोष है। धार्मिक, सामाजिक और संवैधानिक तर्कों के साथ किया गया यह विरोध आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है।
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