नई दिल्ली। देश की सत्ता के केंद्र में ऐतिहासिक बदलाव के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के भवन कॉम्प्लेक्स का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखने का अनावरण किया। इसी के साथ ब्रिटिश कालीन साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
प्रधानमंत्री शुक्रवार शाम करीब 6 बजे ‘सेवा तीर्थ’ के साथ कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का उद्घाटन करेंगे और एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इससे पहले साउथ ब्लॉक में केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक शाम 4 बजे आयोजित की जाएगी। यह ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक में होने वाली आखिरी कैबिनेट बैठक होगी।
वर्तमान में PMO और कई प्रमुख मंत्रालय साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक में संचालित हो रहे हैं। करीब 78 वर्षों से ये इमारतें देश की प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रही हैं।
अब प्रशासनिक कामकाज ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवनों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जो सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा हैं।
‘सेवा तीर्थ’ का अर्थ है—‘सेवा का स्थान’। पहले इसका नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ प्रस्तावित था, लेकिन 2 दिसंबर 2025 को इसे बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। यह नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड स्थित एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में करीब 2.26 लाख वर्ग फीट (लगभग 5 एकड़) क्षेत्र में निर्मित है।
इस परियोजना का निर्माण Larsen & Toubro (एल एंड टी) ने लगभग ₹1189 करोड़ की लागत से किया है।
कॉम्प्लेक्स में तीन मुख्य इमारतें हैं—
सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय
सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय
कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही सेवा तीर्थ-2 में शिफ्ट हो चुका है।
कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, कॉरपोरेट मामलों, रसायन एवं उर्वरक और जनजातीय कार्य मंत्रालय समेत कई प्रमुख विभागों को स्थान दिया गया है।
इससे पहले गृह मंत्रालय नॉर्थ ब्लॉक से जनपथ स्थित कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) बिल्डिंग में शिफ्ट हो चुका है।
सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत निर्मित किए गए हैं। इसी परियोजना के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ का विकास हुआ है।
सरकार की योजना है कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में परिवर्तित किया जाए, जहां भारत की सभ्यता और विरासत से जुड़ी 25-30 हजार कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
कर्तव्य भवन-1 और 2 को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, जल संरक्षण तंत्र, वेस्ट मैनेजमेंट और ऊर्जा दक्ष निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है।
इसके अलावा स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, आधुनिक सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं।
सरकार का दावा है कि नए कॉम्प्लेक्स में मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, कामकाज की रफ्तार और रखरखाव लागत में कमी आएगी। दशकों पुरानी इमारतों में बिखरे कार्यालयों के कारण तालमेल और परिचालन में कई चुनौतियां सामने आ रही थीं।
‘सेवा तीर्थ’ में PMO का स्थानांतरण केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक विरासत के साथ एक युग का समापन हो रहा है, जबकि नए कॉम्प्लेक्स के साथ सरकार भविष्य की जरूरतों के अनुरूप केंद्रीकृत और तकनीक-संपन्न प्रशासनिक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। आने वाले समय में यह बदलाव शासन की कार्यक्षमता और पारदर्शिता पर कितना प्रभाव डालता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
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