राजस्थान: की राजधानी Jaipur स्थित प्रतिष्ठित Sawai Man Singh Medical College (SMS मेडिकल कॉलेज) में एक महिला फैकल्टी द्वारा अपने ही विभाग के प्रोफेसर पर छेड़छाड़ और बदसलूकी का आरोप लगाए जाने के बाद संस्थान में हड़कंप मच गया है।
मामले की शिकायत करीब एक महीने पहले कॉलेज प्रशासन को दी गई थी। शिकायत मिलते ही कॉलेज प्रिंसिपल Dr. Deepak Maheshwari ने जांच के आदेश देते हुए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की। अब इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रिंसिपल को सौंप दी है, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
सूत्रों के अनुसार, महिला प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और छेड़छाड़ की। शिकायत लिखित रूप में कॉलेज प्रशासन को सौंपी गई थी।
मामला संवेदनशील होने के कारण प्रशासन ने तुरंत आंतरिक जांच प्रक्रिया शुरू की।
प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने वरिष्ठ प्रोफेसर Dr. S. M. Sharma की निगरानी में एक जांच कमेटी गठित की।
कमेटी में दो अतिरिक्त प्रिंसिपल—डॉ. आर.के. जैन और डॉ. मोनिका जैन, पूर्व अतिरिक्त प्रिंसिपल बी.एल. कुमावल, स्टूडेंट वेलफेयर डीन डॉ. अनिता सिंघल, विभागाध्यक्ष और अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया।
कमेटी ने संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की।
जांच पूरी होने के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को प्रिंसिपल को सौंप दी। हालांकि रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने कहा, “शिकायत मिली थी। निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी। रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।”
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव Gayatri Rathore ने भी दो अधिकारियों की टीम गठित कर रिपोर्ट तलब की है।
इससे स्पष्ट है कि राज्य स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
SMS मेडिकल कॉलेज राज्य के प्रमुख चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में से एक है। ऐसे में इस तरह के आरोप संस्थान की साख पर सवाल खड़े करते हैं।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा के मुद्दे को सामने ला दिया है। शिक्षण संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच से पीड़िता को न्याय मिल सकता है और संस्थान की विश्वसनीयता भी बनी रहती है।
अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते तो प्रशासन अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा।
फिलहाल, कॉलेज परिसर में इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल है, लेकिन आधिकारिक निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
SMS मेडिकल कॉलेज जयपुर में महिला प्रोफेसर द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप ने चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है। जांच कमेटी की रिपोर्ट सौंप दी गई है और अब प्रशासनिक निर्णय का इंतजार है।
यह मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा और पारदर्शी जांच प्रक्रिया की अहमियत को भी रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में प्रशासन के फैसले से स्थिति स्पष्ट होगी।
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