आगरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के पास शुक्रवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब आगरा से आई एक युवती को पुलिस ने संदिग्ध गतिविधि के शक में रोक लिया। खुद को पीड़िता बताते हुए युवती ने मौके पर रोते-चिल्लाते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया है।
युवती का नाम सरजू यादव बताया जा रहा है, जो आगरा के कालिंदी विहार की रहने वाली है। वह अपनी शिकायत लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर जा रही थी, तभी वहां तैनात पुलिस जवानों ने उसे रोक लिया।
वीडियो में सरजू यादव रोती हुई नजर आ रही है। वह महिला पुलिसकर्मियों से बार-बार कहती सुनाई देती है—
“मुझे छोड़ दो… प्लीज मत ले जाओ। मैं न्याय लेने आई हूं।”
युवती का आरोप है कि
“दरोगा रोहित और चार अन्य एसआई ने आगरा के ट्रांस यमुना थाने में मेरे साथ मारपीट और बदतमीजी की है।”
वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि महिला कांस्टेबल युवती को जबरन पुलिस वाहन में बैठाने का प्रयास कर रही हैं, जबकि वह लगातार विरोध कर रही है।
हंगामे के बाद महिला कांस्टेबलों ने सरजू यादव को पुलिस गाड़ी में बैठाकर गौतमपल्ली थाना पहुंचाया। इस संबंध में आगरा पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद आगरा से पुलिस टीम लखनऊ पहुंची और देर रात युवती को आगरा ले जाया गया।
पूरा मामला शुक्रवार का है, लेकिन इसका वीडियो शनिवार को सामने आया, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।
सरजू यादव कोई नया नाम नहीं है। इससे पहले अगस्त 2024 में आगरा के ट्रांस यमुना थाने में एक महिला दरोगा के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। उस समय भी सरजू यादव ने पुलिस पर थाने के अंदर मारपीट करने और बदसलूकी के आरोप लगाए थे।
उस मामले में पुलिस ने युवती के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की थी।
सरजू यादव के अनुसार, सितंबर 2024 में उनके घर दिनदहाड़े चोरी हुई थी। उन्होंने ट्रांस यमुना थाने में FIR दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने बिना सही जांच किए फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
जब वह इस संबंध में थाने पहुंचीं और SHO रोहित कुमार से सवाल किए, तो वहां विवाद बढ़ गया।
युवती का दावा है कि
उन्हें थाने के अंदर बंद किया गया
मोबाइल छीनने की कोशिश हुई
मारपीट की गई
कपड़े तक फाड़ दिए गए
इस घटना से जुड़े तीन अलग-अलग वीडियो भी उस समय सामने आए थे, जिनमें अलग-अलग दावे किए गए थे।
सीएम आवास के पास आगरा की युवती का यह मामला एक बार फिर पुलिस और आम नागरिक के बीच टकराव की तस्वीर पेश करता है। जहां एक ओर युवती खुद को पीड़िता बताकर न्याय की गुहार लगा रही है, वहीं पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाता है या नहीं।
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