कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ऑपरेशन सिंदूर थीम पर आधारित विशेष पतंगों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इन पतंगों के माध्यम से देश की सैन्य शक्ति, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उत्साहित नजर आए।
पतंग महोत्सव के दौरान लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और राजस्थान की लोक परंपराओं को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, हवा महल विधायक बालमुकुंदाचार्य, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ देशी-विदेशी पर्यटक भी उपस्थित रहे। जलमहल की पाल रंग-बिरंगी पतंगों, पारंपरिक परिधानों और लोक संगीत से सराबोर नजर आई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जलमहल के बाद मुख्यमंत्री निवास पर भी पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया। उन्होंने लोक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सहेजने का संदेश दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि
“सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाया जाने वाला यह पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, भाईचारे और उत्साह का संचार करता है।”
जलमहल से मुख्यमंत्री निवास तक मनाया गया मकर संक्रांति का यह उत्सव परंपरा, संस्कृति और आधुनिक संदेशों का अनूठा संगम बनकर सामने आया। पतंगों की इस रंगीन उड़ान ने न केवल जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत किया, बल्कि राज्य की सकारात्मक और जीवंत छवि को भी उजागर किया।
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