लखनऊ: विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब रोहित वेमुला स्मृति मार्च के दौरान दो प्रमुख छात्र संगठनों के बीच टकराव हो गया। बिरसा अंबेडकर फुले छात्र संगठन (BAPSA) की ओर से निकाले गए मार्च के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों के साथ झड़प हो गई, जो देखते-ही-देखते मारपीट तक पहुंच गई।
स्थिति को संभालने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कैंपस में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर BAPSA के छात्र विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए और अंबेडकर प्रतिमा के पास रोहित वेमुला की याद में प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद छात्रों ने मार्च निकाला और नारे लगाए—
“रोहित, हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं।”
मार्च के दौरान नारेबाजी को लेकर दूसरे छात्र गुट से बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में दोनों पक्षों की ओर से तेज नारेबाजी होने लगी और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
बहस के बाद BAPSA और ABVP से जुड़े छात्र आमने-सामने आ गए। टकराव इतना बढ़ गया कि धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पुलिस कर्मी दोनों गुटों को अलग-अलग करने और हालात को काबू में लाने की कोशिश करते नजर आए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टकराव के दौरान पुलिस भी कुछ समय के लिए असहाय नजर आई, हालांकि बाद में अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए स्थिति को नियंत्रण में लिया गया।
बताया जा रहा है कि इससे पहले BAPSA के छात्रों को पुलिस ने शांतिपूर्वक समझाकर लौटा दिया था। लेकिन कुछ समय बाद फिर से माहौल बिगड़ गया और झड़प हो गई।
घटना के बाद BAPSA की ओर से जारी बयान में गंभीर आरोप लगाए गए। संगठन ने कहा कि
“रोहित स्मृति यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण थी, लेकिन RSS और ABVP से जुड़े गुंडों ने छात्रों पर हमला किया। यात्रा को रोकने का प्रयास किया गया और छात्रों को जान से मारने की कोशिश तक की गई।”
BAPSA के अनुसार, इस झड़प में एक छात्र को गंभीर चोट भी आई। बयान में यह भी कहा गया कि भारी विरोध के बावजूद यात्रा ‘जय भीम’ के नारों के साथ संपन्न हुई।
BAPSA के छात्रों का कहना है कि कैंपस में छात्रों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए और ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति न बने।
लखनऊ विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला स्मृति मार्च के दौरान हुआ यह टकराव छात्र राजनीति में बढ़ते तनाव को दर्शाता है। नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है।
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